मोदी सरकार की ओर से उठाये गये कदमों से बदल रहा है अर्थव्यवस्था का स्वरूप
Open Eye News|September 2020
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मोदी सरकार की ओर से उठाये गये कदमों से बदल रहा है अर्थव्यवस्था का स्वरूप
कोरोना वायरस महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप कुछ बदलने की राह पर जाता दिखाई दे रहा है। अभी तक भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान काफ़ी कम रहता है एवं सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक रहता है। परंतु बदली हुई परिस्थितियों में कृषि का योगदान कुछ बढ़ता नज़र आ रहा है एवं सेवा क्षेत्र का योगदान कम हो सकता है क्योंकि पर्यटन एवं होटल उद्योग कोरोना वायरस महामारी में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं और ये दोनों उद्योग सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
प्रह्लाद सबनानी

भारत में कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है एवं अपने रोजगार के लिए मुख्यतः कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर है। इस प्रकार भारत में कृषि का क्षेत्र एक सिल्वर लाइनिंग के तौर पर देखा जा रहा है। भारत में आम तौर पर हम लोग कृषि क्षेत्र में चावल, दाल, गेहूँ, तेल-वनस्पति, आदि कुछ चीज़ों के उत्पादन पर ही अपना ध्यान के द्रित करते हैं। परंतु, देश में एक और महतवपूर्ण क्षेत्र है, जो कृषि क्षेत्र के अंतर्गत आता है और जो बड़ी तेजी से विकसित हो रहा है। वह क्षेत्र है बागवानी (हॉर्टिकल्चर) का। बागवानी क्षेत्र पर पहले तो हमारे किसानों का कम ध्यान रहता था परंतु अब इस ओर देश के किसानों का ध्यान गया है और हाल ही के समय में इसकी पैदावार में काफ़ी इज़ाफ़ा होते देखा जा रहा है। कृषि वर्ष 2019-20, जो जुलाई-जून की अवधि के दौरान रहता है, में यदि अनाजों के पैदावार की बात करें तो लगभग 30 करोड़ टन की उपज का अनुमान लगाया गया है वहीं बागवानी के क्षेत्र में 32 करोड़ टन की उपज होने का अनुमान है। अभी हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा अगले पैराग्राफ़ में वर्णित कृषि क्षेत्र से सम्बंधित तीन अति महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिसके परिणाम भी परिलक्षित होने लगे हैं। जून 2020 को समाप्त तिमाही में, जब कोरोना वायरस महामारी के चलते पूरे देश में आर्थिक गतिविधियाँ लगभग बंद थीं, ऐसे में कृषि क्षेत्र से निर्यात 23.24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 25,552.7 करोड़ रुपए पर पहुँच गए हैं। भारत को आत्म निर्भर बनाने में कृषि क्षेत्र का आत्म निर्भर होना भी बहुत ज़रूरी है। दूसरे, कृषि क्षेत्र से निर्यात में वृद्धि का सीधा लाभ किसानों की आय में वृद्धि के रूप में होता है।

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