भारत का इतिहास भाईचारे का अमेरिकी के नाम से जन्मा है मॉब लिचिंग
Open Eye News|August 2020
भारत का इतिहास भाईचारे का अमेरिकी के नाम से जन्मा है मॉब लिचिंग
लिंचिंग' ये शब्द अमेरिका से ही आया है इस बात में संदेह नही है , कुछ लोग जिसे विलियम लिंच के नाम से जानते है तो कुछ चा लिंच के नाम से उसने एक क्रांति के दौरान अपनी निजी अदालतें बिठानी शुरू की और अपराधियों तथा विरोधी षड्यंत्रकारियों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सजा देने लगा।
अभिनय आकाश

मॉब लिंचिंग आपने इस शब्द के बारे में बहुत सुना होगा, बहुत पढ़ा होगा। यह एक फैशनेबल शब्द माना जाता है और सूडो सेक्यूलर, देश के सेलिब्रिटी और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं का मनपसंद शब्द बन गया है यह। इसी मॉब लिंचिंग का सहारा लेकर यह तमाम लोग खुलकर राजनीति करते हैं और पूरे देश में असहनशीलता का एजेंडा चलाते हैं। अब ऐसा लगने लगा है कि मॉब लिंचिंग हिन्दी का ही शब्द है। कुछ ही समय पहले लोगों को समझाना पड़ता था कि जब भीड़ किसी को घेरकर पीट-पीटकर मार डालती है तब उसे मॉब लिंचिंग कहा जाता है।

जिस तरह से लोकतंत्र को अंग्रेजी में डेमोक्रेसी कहा जाता है उसी तरह से भीड़तंत्र को अंग्रेजी में मोबोक्रेसी कहा जाता है। वैसे तो डेमोक्रेसी के साथ मोबोक्रेसी का जिक्र तकनीकी रूप से गलत है। क्योंकि लोकतंत्र में भीड़-तंत्र की कोई जगह नहीं होती। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लगता है कि लोकतंत्र के अंदर भीड़तंत्र का अतिक्रमण हो गया है। इसी शब्द का इस्तेमाल कुछ अंग्रेजी बोलने वाले सेलिब्रिटी लगातार करते रहे हैं और मॉब लिंचिंग को एक गुप्त एजेंडे के तहत धर्म विशेष से जोड़ कर समाज को बांटने की लगातार कोशिश भी हुई है। ये साबित करने की कोशिश हुई की हिंसा और इस तरह की घटना के लिए बहुसंख्यक आबादी ही जिम्मेदार है और अल्पसंख्यकों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। मॉब लिंचिंग दरअसल आज से नहीं बल्कि सैकड़ों सालों से हो रही है। 19 अगस्त, 1901 को तीन अफ्रीकी अमेरिकियों को दी गई मौत की सजा के बाद मार्क ट्वेन ने अमेरिकियों पर लिंचिंग का आरोप लगाते हुए यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ लिंचरडम का प्रसिद्ध लेख लिखा था।

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

August 2020

MORE STORIES FROM OPEN EYE NEWSView All