जगन बनाम जज
India Today Hindi|November 04, 2020
जगन बनाम जज
जगन रेड्डी ने शीर्ष न्यायपालिका पर पक्षपाती और भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया
अमरनाथ के. मेनन

अक्तूबर की 6 तारीख को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइ.एस. जगन मोहन रेड्डी ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) एस.ए. बोबडे को एक चिट्ठी लिखी जिसने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच असाधारण टकराव पैदा कर दिया है. जगन और उनके पूर्ववर्ती एन. चंद्रबाबू नायडू के बीच सियासी गोलीबारी की जद में एक और शख्सियत आ गई है और वे हैं प्रतीक्षारत भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमन. अगर पदानुक्रम के हिसाब से चीजें आगे बढ़ी तो बोबडे की जगह वे ही लेंगे.नायडू और रमन के बीच लंबे वक्त से सांठगांठ के अलावा भ्रष्टाचार और न्यायिक कदाचार के आरोप लगाते हुए जगन-नायडू की तीखी प्रतिद्वंद्विता में न्यायपालिका को भी घसीट लिया गया है (देखें बॉक्सः रमन के खिलाफ आखिर क्या हैं जगन के आरोप).

जगन रेड्डी की ओर से गठित राज्य मंत्रिमंडल की एक उप-समिति ने पिछले साल 27 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि नायडू ने प्रभावशाली और उनकी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के साथ सहानुभूति रखने वाले लोगों को राज्य की प्रस्तावित राजधानी अमरावती के बारे में अंदरूनी जानकारियों के जरिए भारी मुनाफा कमाने की इजाजत दी; अधिसूचित किए जाने से पहले जमीनें खरीद ली गईं और बाद में भारी मुनाफे पर बेच दी गईं. उपसमिति ने नायडू (तब मुख्यमंत्री), उनके बेटे नारा लोकेश, तत्कालीन महाधिवक्ता दम्मलापति श्रीनिवास और कई अन्य के गैरकानूनी कामों को सामने रखा. उपसमिति की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए लिए राज्य सरकार ने इस साल फरवरी में एक विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित किया. इधर यह सब चल रहा था और उधर सरकार ने अमरावती जमीन घोटाले में आर्थिक फायदों के लिए सट्टेबाजी में लिप्त रहने वाले लोगों के खिलाफ आंध्र प्रदेश निर्दिष्ट भूमि (हस्तांतरण का निषेध) अधिनियम 1977 के तहत मामले दर्ज किए.

जगन की व्यापक योजना टीडीपी को नुक्सान पहुंचाना है और नायडू के हिसाब चुकता करना है जिन्होंने उन्हें भ्रष्टाचार के कई मामलों उलझा दिया, तब से जब उनके पिता वाइ.एस. राजशेखर रेड्डी (वाइएसआर) अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. वे मामले अब भी चल रहे हैं. इस महीन की शुरुआत में हैदराबाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने से छूट दे दी. जगन पहले ही 16 महीने जेल में बीता चुके हैं.

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November 04, 2020