उनके पास ताकत है
India Today Hindi|October 28, 2020
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उनके पास ताकत है
महामारी में यह संभावना होती है कि वह राजनैतिक सत्ता को सर्वव्यापी बना दे या एक नई व्यवस्था की ओर बढ़ने का संकेत दे दे. पर मजे की बात है कि कोविङ-19 ने सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष दोनों की सियासी पूंजी में इजाफा किया है.
उन्नीथन,कौशिक डेका, उदय माहूरकर, संदीप अनिलेश एस. महाजन, श्वेता पुंज, आशीष मिश्र और रोमिता दत्ता

देश में अब मरीजों की तादाद अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा है और सरकार को अर्थव्यवस्था का कमरतोडू लॉकडाउन लगाने के लिए आलोचना झेलनी पड़ी है. पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रेटिंग अब तक के सबसे ऊंचे मुकाम पर है और काफी लोग उन्हें अब भी राष्ट्रीय उद्धारक के रूप में देखते हैं. मोदी विरोधियों के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी विपक्ष के रहनुमा बन गए हैं, अक्सर अकेली आवाज जो प्रधानमंत्री को ललकारती दिखती है. राज्यों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हिंदू राष्ट्रवाद और सख्त राजकाज के पोस्टर बॉय बनकर उभरे हैं, जबकि बंगाल में जबरदस्त चुनावी जंग का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें भाजपा की दक्ष चुनाव मशीनरी मंझी खिलाड़ी ममता बनर्जी से लोहा लेगी. एक बात पक्की है: महामारी के दौरान सत्ता उन्हीं के पास रहेगी जो न सिर्फ वायरस का बल्कि विपक्षियों के नैरेटिव का भी मुकाबला कर सकें

1.नरेंद्र मोदी -70 वर्ष प्रधानमंत्री

आत्मनिर्भरता के चैंपियन

क्योंकि वे भारत के निर्विवाद नेता और अपने बारे में किंवदंती गढ़ने में समर्थ एकमात्र राजनीतिक बने हुए हैं. यहां तक कि उनकी लहराती दाढ़ी या मोर के साथ एक तस्वीर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन सकती है

क्योंकि ऐसा लगता है कि कोई भी घटनाक्रम उनकी लोकप्रियता में सेंध नहीं लगा सकता, न रसातल में जाती अर्थव्यवस्था, न परवान चढ़ती महामारी, न सरहद पर चीनी आक्रामकता और न ही प्रवासी संकट

क्योंकि उन्होंने भारत को खुद अपने भरोसे जीने वाले राष्ट्र में बदलने की संभावना से भरपूर आत्मनिर्भर भारत का आह्वान देकर कोविड-19 महामारी को एक अवसर में तब्दील कर दिया

क्योंकि वे कट्टर राष्ट्रवाद की भावना से परिचालित बहुसंख्यक हिंदू आबादी के सबसे मजबूत नायक बनकर उभरे हैं. उनके कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर का फैसला आने और केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 को रद्द कर देने के साथ जनधारणा इसी विचार के इर्द-गिर्द और भी एकजुट हो गई

शाही अंदाजः प्रधानमंत्री मोदी को अपने स्कूल के दिनों से ही राजा की भूमिका निभाने का शौक है. अपने शहर वडनगर में उन्होंने जोगीदास खुमन नामक नाटक में भावनगर के राजा विजय सिंह गोहिल की भूमिका निभाई थी. नाटक में एक सिद्धांतवादी और नियमविरोधी व्यक्ति राजा के खिलाफ बगावत कर देता है

2,अमित शाह -55 वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री

फौलादी इरादे वाला नेता

क्योंकि बीते एक साल में उन्होंने अनुच्छेद 370 को रद्द करने से लेकर नागरिकता (संशोधन) कानून 2019 (सीएए) को पारित करवाने तक देश में राजनैतिक बहस की दिशा तय करने का काम किया है

क्योंकि जब साहसी और विवादास्पद फैसले लेने की बात आती है तब वे जनधारणा और आलोचना की रत्ती भर भी परवाह नहीं करते. चुनाव जीतने से लेकर विरोधी सरकारों को गिराने तक यानी जीतने के लिए जो भी चाहिए वे सब कुछ करने को हमेशा तैयार रहते हैं

क्योंकि वे प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार हैं. कानूनव्यवस्था को संभालने से लेकर चुनावी रणनीति बनाने और कोविड-19 से निबटने के कामों की निगरानी तक, सबको लागू करवाने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है

क्योंकि भाजपा अध्यक्ष न रहने के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी में कोई भी निर्णय उनसे मशविरे के बगैर नहीं लिया जाता

कमजोर पहलूः पूरी तरह पारिवारिक व्यक्ति शाह के पसंदीदा लम्हे वे हैं जिनमें वे अपनी तीन वर्षीया पोती रुद्रि के साथ होते हैं. एक बार उन्होंने अपनी हेलिकॉप्टर यात्रा इसलिए विलंब कर दी क्योंकि उनकी बहू ऋषिता उनसे मिलने आ रही थीं

3.मोहन भागवत -70 वर्ष सरसंघ चालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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October 28, 2020