दिग्गज प्रशासक
India Today Hindi|October 28, 2020
दिग्गज प्रशासक
चीन से गतिरोध जब चरम पर था, उसी वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले एक आगंतुक का कहना था कि वे मोदी को इस कदर शांतचित्त देखकर स्तब्ध थे.

प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम को कई महत्वपूर्ण कार्य सौंपे हैं-किसी भी सफल मुख्य कार्यकारी (सीईओ) की तरह-और उन्हें टीम पर पूरा भरोसा है. उन्हें उन कामों को लेकर अतिरिक्त निगरानी या चिंता करने की जरूरत नहीं महसूस होती. उनकी सरकार को दूसरे कार्यकाल के 18 महीने पूरे होने वाले हैं, अपने विजन को अमली जामा पहनाने को लेकर नौकरशाहों पर प्रधानमंत्री की निर्भरता पहले से ज्यादा बढ़ी है. ऐसा तब है जब देश इस साल महामारी, राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन, आर्थिक मंदी और चीन के साथ सीमा गतिरोध जैसे अपूर्व संकटों से जूझ रहा है.

कुछ परिचित चेहरे, जैसे पी.के. मिश्र और अजीत डोभाल को तरक्की देकर उन्हें कैबिनेट रैंक दिया गया है. पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में जनरल बिपिन रावत की नियुक्ति जैसे कुछ अहम फैसले भी हुए हैं. ये सारी नियुक्तियां नौकरशाही को और कुशल बनाने के लिए की गई हैं. कुछ नौकरशाहों जैसे अमित खरे को दो अलग मंत्रालयों का सर्वेसर्वा नियुक्त करना दिखाता है कि मोदी सरकार में अच्छे काम का एकमात्र इनाम और अधिक जिम्मेदारी मिलना है.

1.पी.के.मिश्र -72 वर्ष प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव सुपर बाबू

क्योंकि नौकरशाहों, विशेषज्ञों और राजनेताओं की प्रशासनिक नियुक्ति में वे प्रमुख भूमिका निभाते हैं

क्योंकि हाल के बरसों में पीएम के किसी भी प्रमुख सचिव ने इतनी विविधतापूर्ण भूमिका नहीं निभाई है. कोविड-19 के लिए 11 समूहों का गठन और हालिया कृषि सुधार जैसे महत्वपूर्ण कानून तैयार करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

क्योंकि नौकरशाही और नीतियों की गहरी समझ और अपनी लगन के कारण वे प्रधानमंत्री के आंख और कान हैं. प्रशासन के सभी क्षेत्रों से दलालों का सफाया करने में पीएम के प्रमुख मददगार हैं ताकि विकास का फल सीधे जनता तक पहुंचाया जा सके

आपदा विशेषज्ञ मई 2019 में वे बाढ़ और सूखे से सबसे अधिक प्रभावित समुदायों की स्थितियों में सुधार, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच बढ़ाने और असमानता और सामाजिक समावेश को बढ़ाते हुए गरीबी को कम करने के लिए अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए संयुक्त राष्ट्र के ससाकावा पुरस्कार के तीन विजेताओं में से एक रहे थे

2.अजीत डोभाल -75 वर्ष! राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

सुरक्षा सबसे पहले

क्योंकि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में साढ़े छह साल तक सबसे लंबे समय तक कार्य करते हुए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे के लिए अपरिहार्य हो गए हैं. वे केंद्र की पाकिस्तान नीति के प्रमुख सलाहकार और चीन के साथ प्रमुख वार्ताकार हैं. हाल के महीनों में उलझने को आमादा चीन को संभालने के लिए सरकार की रणनीति तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है

क्योंकि उनकी आक्रामक रक्षा रणनीति भारत के नए राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का एक प्रमुख पहलू है. बालाकोट में हवाई हमले से लेकर लद्दाख में चीन की आक्रामकता का जवाब देने के लिए तिब्बती मूल के लोगों की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के सैनिकों को भेजने के आदेश देने तक सीमा पार से मिलने वाली चुनौतियों पर केंद्र की आक्रामक रक्षा रणनीति तैयार करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है

क्योंकि वे अपनी भूमिकाओं को लेकर सजग और सतर्क रहते हैं और जब बात समस्याओं से निबटने की आती है तो वे फाइल को टेबल तक आने की प्रतीक्षा किए बगैर हल निकालने में जुट जाते हैं

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