ये दुनिया हमारी
India Today Hindi|October 28, 2020
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ये दुनिया हमारी
हम विदेशों में बसे भारतीयों की कामयाबियों को अपना मानकर गर्व करते आए हैं, पर इस साल जब कोरोना वायरस ने सरहदों को बेमानी बना दिया, ये प्रवासी भारतीय ही थे जिन्होंने हमें खुशियां मनाने की सबसे ज्यादा वजहें दी.
श्रीवत्स नेवतिया

सौम्या स्वामीनाथन सरीखी प्रवासी भारतीय विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविङ-19 के खिलाफ लड़ाई की अगुआई कर रही हैं, वहीं ऋषि सुनक और गीता गोपीनाथ सरीखे राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री वित्तीय कठिनाई कम करने में देशों और लोगों की जी-जान से मदद कर रहे हैं. ये वे हिंदुस्तानी हैं जो दुनिया के लिए ही बने हैं.

हिंदुजा और मित्तल ने दुनिया के दौलतमंदों की फेहरिस्तों में फिर जगह बनाई. इतना ही नहीं, सिलिकन वैली के भारत में जन्मे सुंदर पिचाई, सत्य नडेला और शांतनु नारायण सरीखे सीईओ अपनी कोशिशों से अचानक अत्यधिक डिजिटल हो गई हमारी जिंदगियों में रास्ता खोजने में मदद कर रहे हैं. नस्ल और भेदभाव के मुद्दों ने दुनिया को शिद्दत से विचार करने पर मजबूर किया, वहीं कमला हैरिस सरीखों की आवाजें बताती हैं कि हम कितना आगे आ गए हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार ने हाल ही कहा, इस वायरस की आंखें नहीं हैं, फिर भी यह जानता है कि हम एक दूसरे को कैसे देखते हैं. हकीकत साफ है: दुनिया भारत को आखिरकार अलग अंदाज से देख रही है.

1.कमला हैरिस -55 वर्ष उप-राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी

कितने मोर्चों पर पहली बार

क्योंकि वे पहली भारतीय अमेरिकी और पहली अश्वेत महिला हैं जो बड़ी पार्टी के टिकट पर अमेरिकी उप-राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रही हैं

क्योंकि वे वादा करती हैं कि उन विद्वेषपूर्ण नस्लीय रिश्तों को फिर से एक तार में पिरोएंगी, जो कि आज के अमेरिकी जीवन और राजनीति को तार-तार किए दे रहे हैं. हाल के अपने एक भाषण में उन्होंने ठीक ही कहा, नस्लवाद का कोई वैक्सीन नहीं.

क्योंकि वे सत्ता से सीधे और दो-टूक बात करती हैं. जो बाइडेन के उन्हें अपना साथी प्रत्याशी बनाने से पहले कमला ने मानवाधिकारों के लिए पर्याप्त प्रयास न करने के पहलू पर बाइडेन की भी सार्वजनिक तौर पर खिंचाई की थी

मां की दुलारी हैरिस की मां, चेन्नै में जन्मीं श्यामला गोपालन 1959 में 19 साल की उम्र में अमेरिका आ गई थीं. नस्लीय भेदभाव के खिलाफ आंदोलनों में वे बेटी को स्ट्रॉलर पर ले जाती थीं. एक बार उन्होंने कहा थाः “कई चीजें तुम शायद पहली बार करो, पर पक्का करो कि तुम आखिरी न हो.

2.ऋषि सुनक -40 वर्ष। वित्त मंत्री, ब्रिटेन

मुश्किल में निखरी शख्सियत

क्योंकि राजनीति में आए महज पांच साल ही हुए थे कि उन्हें ब्रिटेन के दूसरे सबसे अहम राजनैतिक दायित्व वाले पद पर पदोन्नत करके वित्त मंत्री बना दिया गया

क्योंकि कोविड-19 महामारी से भयभीत हुए बगैर उन्होंने नौकरियां बचाने के लिए पूरी तरह से सरकारी पैसे वाली भारी-भरकम अवकाश योजना लाकर सोची-समझी दूरदृष्टि का परिचय दिया

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October 28, 2020