तृणमूल युवराज
India Today Hindi|September 23, 2020
तृणमूल युवराज
ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने पार्टी पर पकड़ मजबूत की और 2021 की बड़ी चुनावी जंग के मुख्य सूत्रधार बने
रोमिता दत्ता

फ़ोन पर अलर्ट आता है और कॉन्फ्रेंस रूम में खामोशी छा जाती है, जहां कुछ पल पहले तक सांसद, विधायक और कैबिनेट मंत्री गप्पें मार रहे थे. स्मोकिंग जोन में धुआं उड़ा रहे लोग सिगरेट फेंककर अपनी कुर्सियों की ओर भागते हैं. कोलकाता के पूर्वी मेट्रोपॉलिटन बाइपास पर स्थित तृणमूल कांग्रेस भवन के बाहर सादे कपड़ों में तैनात पुलिसवालों ने तकरीबन 50 समर्थकों के बीच रास्ता बनाया और आठ कारों के काफिले को अंदर जाने दिया. मुख्य प्रवेश पर एक काली टोयोटा फॉर्म्युनर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 'युवराज' अभिषेक बनर्जी उतरे और बिना इधर-उधर देखे भीतर चले गए. पार्टी के कुछ वरिष्ठ लोग उन्हें देख खड़े हो गए. दो-एक नेताओं के साथ दो-चार बातें हुईं और फिर हॉल में सन्नाटा छा गया.

कुछ मिनट बाद, भूरे रंग की हुंडई आई-20 कार आती है. बिना किसी तामझाम और बिना बीकन के. सामने की सीट पर बैठी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कार से उतरती हैं और इंतजार कर रहे लोगों का हाथ हिलाकर अभिनंदन करती हुई कॉन्फ्रेंस रूप में प्रवेश करती हैं. कुछ देर पहले जहां सन्नाटा पसरा था, उस हॉल में जैसे रौनक लौट आई है. बातचीत शुरू हो जाती है, और ममता के बैठने के साथ ही वहां मौजूद उनके पुराने साथियों के बीच सहज माहौल बन जाता है.

ममता और अभिषेक एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. ममता जहां जीवन को सादगीपूर्ण रखना पसंद करती हैं, तो उनके भतीजे को चकाचौंध लुभाता है. दीदी का अंदाज दोस्ताना है और वे सबके साथ बात करना पसंद करती हैं तो अभिषेक गंभीर और मित्तभाषी हैं. ममता ने छात्र नेता से लेकर केंद्रीय मंत्री और फिर मुख्यमंत्री तक, अपने संघर्ष के बूते राजनीति का हर सोपान चढ़ा है. इसके विपरीत अभिषेक को सब कुछ दीदी की लोकप्रियता और तृणमूल के दिग्गजों की मेहनत की बदौलत मिला है.

अभिषेक का उदय

पार्टी प्रबंधन, उम्मीदवारों का चयन, जिम्मेदारियां बांटना या फिर संसाधन जुटाने का काम, तृणमूल में सब कुछ अभिषेक की पसंद से होता है. 2018 के पंचायत चुनाव के दौरान, जब अभिषेक ने 'प्रतिद्वंद्वी-विहीन पंचायत' का आह्वान किया, तो तृणमूल ने 30 प्रतिशत से अधिक सीटें बिना किसी मुकाबले के ही जीत ली. 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल जब भाजपा से केवल चार अधिक सीटें (बंगाल की 42 में से 22 तृणमूल और 18 भाजपा) ही जीत पाई तो भी अभिषेक के दबदबे में रत्तभीर कमी नहीं आई. अभिषेक को ही 2021 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है. उन्होंने ही पिछले जून में प्रशांत किशोर और उनकी आइपैक (इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमेटी) को जोड़ा. 'युवा योद्धाओं' की फौज बनाने के तृणमूल के 'जुबो शक्ति (युवा शक्ति)' अभियान का नेतृत्व भी अभिषेक ही कर रहे हैं.

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September 23, 2020