कोविड के साथ अब बाढ़ का कहर
India Today Hindi|September 16, 2020
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कोविड के साथ अब बाढ़ का कहर
अनुमान से अधिक बारिश से प्रदेश के दर्जन भर जिलों में फसलों को भारी नुक्सान. महामारी के चलते आर्थिक मुश्किलों में फंसी सरकार पर अब मुआवजे का दबाव
राहुल नरोन्हा

नर्मदा के किनारे स्थित, होशंगाबाद जिले के कोंडरवाड़ा गांव के 50 वर्षीय असीम दत्ता का चेहरा अपने गांव में 28 और 29 अगस्त को आए कहर का ब्यौरा देते हुए स्याह हो जाता है. रुंधे गले के साथ वे बताते हैं, "अपनी जिंदगी में नर्मदाजी का ऐसा प्रलयकारी अवतार पहले कभी नहीं देखा था. मेरा घर, मवेशी, फसल, नर्मदाजी के रास्ते में जो भी आया वेलीलती चली गईं." गांव के लोग जान बचाने ऊंचे इलाके में भाग गए और नदी का कोप शांत होने के लिए पूरी रात प्रार्थना करते रहे. 31 अगस्त को जाकर बारिश बंद हुई और नर्मदा का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा. एक सप्ताह होने को है और लोगों की आजीविका पर अब बाढ़ का असल प्रभाव दिखने लगा है. ज्यादातर किसानों ने पूसा बासमती धान की बुआई की थी.

यह धान की एक ऐसी किस्म है जो मुख्य रूप से निर्यात की जाती है और इसने नर्मदा के उत्तरी तट पर स्थित रायसेन, सीहोर और दक्षिणी तट पर स्थित हरदा और होशंगाबाद जिलों के काश्तकारों की आय के स्तर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है. कुछ किसानों ने सोयाबीन की भी बुआई की है. सोयाबीन की पैदावार के मामले में मध्य प्रदेश देश में प्रमुख स्थान रखता है. सोयाबीन की फसल तो पूरी तरह से खराब हो गई है, लेकिन जहां पानी अब घट चुका है उन इलाकों में खेत कीचड़ से भर गए हैं. दत्ता कहते हैं, "जब तक भारी बारिश नहीं होती, पत्तियों पर लगा कीचड़ नहीं धुलेगा. गांव के बड़े-बुजुर्गों से 1973 की बाढ़ के कहर के बारे में सुना था. उस रात भी लगभग वही स्थिति थी.'

मध्य प्रदेश में 31 अगस्त तक कुल 815 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि अनुमान 743 मिमी तक का था. राज्य के 52 में से 31 जिलों में सामान्य बारिश हुई है जबकि 21 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है. राज्य के 251 प्रमुख जलाशयों में से अधिकांश लगभग भरे हुए हैं. तवा, बरगी, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसे बड़े बांधों के द्वार सप्ताहांत में खुले थे, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का अंदेशा बढ़ा था. अधिकांश बाढ़ इन बांधों से छोड़ा गया पानी के नर्मदा की उन सहायक नदियों के जलक्षेत्रों में पहुंचने से आती है जो आखिरकार नर्मदा में ही मिल जाती हैं. मैदानी इलाकों से पानी नर्मदा में पहुंच जाता है और इससे बाढ़ की स्थिति पैदा होने से बच जाती है पर सहायक नदियों से नर्मदा पहुंचे पानी के कारण इस बार वह गुंजाइश ही नहीं बची.

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September 16, 2020