सिलसिला सियासी जीत का
सिलसिला सियासी जीत का
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह अनौपचारिक बातचीत में अक्सर यह कहा करते हैं, "चुनाव में जीतना जितना जरूरी है, सियासत में भी जीतना उतना ही जरूरी है.
सुजीत ठाकुर और उदय माहूरकर

वरना चुनाव जीतने के बाद भी सियासी हार खेल बिगाड़ देने का माद्दा रखती है." शाह की इस बात का मर्म समझने में अगर कांग्रेस चूकी नहीं होती तो शायद यह नौबत नहीं आती कि मध्य प्रदेश की सत्ता उसके हाथों से छूटने के कगार तक पहुंच जाए. फिलहाल राज्य के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए हैं जिन्हें एक राजनेता से कहीं बेहतर, एक प्रशासक के रूप में देखा जाता है.

एक शाही परिवार के वंशज होने के नाते, कई लोगों के मन में यह आशंका भी है कि कांग्रेस जैसी सामंती व्यवस्था वाली पार्टी के विपरीत भाजपा जैसी कैडर-आधारित पार्टी में क्या वे खुद को ढाल पाएंगे? पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे एक भाजपा नेता कहते हैं, “सिंधिया को खुद को बहुत बदलना होगा क्योंकि भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है." कांग्रेस में, यहां तक कि ग्वालियर क्षेत्र के बाहर के नेता भी सिंधिया को 'महाराज' कहकर संबोधित करते थे और उन्हें राजाओं जैसा मान देते थे. संभवतः ग्वालियर क्षेत्र में भाजपा में उन्हें यह रुतबा मिल जाए, पर उन्हें अन्य कहीं इसकी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए. सिंधिया जब कांग्रेस में थे उस दौरान उनके करीबी रहे एक सूत्र का कहना है, "भाजपा में काम करने के लिए उन्हें अपनी राजनैतिक कार्यशैली और यहां तक कि अपने निजी ठाट भी छोड़ने पड़ जाएंगे." उनके पुराने सहयोगी बताते हैं कि उनका ठाट या रवैया ही वास्तव में वह कारक रहा है जिसने सत्ता में उन्हें वह हैसियत नहीं हासिल करने दी जिसकी उन्हें आकांक्षा रही है क्योंकि वे अक्सर तन जाते हैं. दिवंगत माधवराव सिंधिया शांत स्वभाव के और स्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने में सक्षम थे, पर ज्योतिरादित्य में अपने पिता के ये गुण कम हैं. एक अन्य सूत्र कहते हैं, "सफल होने के लिए उन्हें झुकना पड़ेगा. इस मोड़ पर वे और मौके गंवाने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि अगर उन्होंने मौके गंवा दिए तो उनकी जगह लेने को बहुत-से लोग तैयार बैठे हैं."

सिंधिया की राह

भाजपा के लोगों का कहना है कि उन्हें बहुत सतर्क रहते हुए यह पक्का करना होगा कि इस पार्टी में आने का वे उचित फायदा ले सकें। क्योंकि ऐसे पर्याप्त उदाहरण हैं जो बताते हैं कि लोग बड़े-बड़े आश्वासनों के साथ पार्टी में शामिल हुए पर उपयोगिता खत्म हो जाने के बाद उन्हें अधर में छोड़ दिया गया. भाजपा के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि सिंधिया को कैबिनेट में एक अच्छा मंत्रालय देने का वादा किया गया है. उन्हें वह' आदर' भी दिया जा रहा है जो उन्हें कांग्रेस में मिलता था. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को न केवल सिंधिया को सार्वजनिक रूप से ' महाराज' के रूप में संबोधित करते हुए देखा गया था, बल्कि जब सिंधिया भोपाल में उनके घर भोजन के लिए आए, तब शिवराज ने उन्हें बैठने के लिए मेजबान की अपनी कुर्सी की पेशकश की थी.

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April 01, 2020