कोरोना के साये में जिंदगी
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कोरोना के साये में जिंदगी
कोरोना वायरस से भारत में पहली मौत दर्ज होते ही देश इस जानलेवा विषाणु को फैलने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान, सामाजिक मेलजोल पर अंकुश लगाने और सेहत दुरुस्त रखने की बुनियादी जरूरतों जैसे तमाम उपायों में जुटा है. फिलहाल खस्ताहाल अर्थव्यवस्था की सुध पीछे छूटी
श्वेता पुंज, अनिलेश एस. महाजन, किरण डी. तारे, रोमिता दत्ता, अरविंद गौड़ा और रोहित परिहार

राजधानी दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ने वाले सात साल के अंकित सहगल ने टीवी पर हो रहे ऐलान से सीखा है, "अगर मैं अपने हाथ लगातार धोता रहूंगा तो चीनी वायरस दूर रह सकता है." उसे स्कूल बंद होने का कोई गुरेज नहीं है. उसे घर पर मशगूल रहने के लिए माता-पिता ने स्मार्टफोन दे दिया है. उसके फोन में हाथ धोने की याद दिलाने वाला' ऐप भी है, जो उसे हर घंटे याद दिलाता है कि "अब हाथ धोने का वक्त है." अंकित बड़े चाव से हैपी बर्थडे गीत दो बार गुनगुनाते हुए हर घंटे अपने हाथ से नॉवेल कोरोना वायरस को दूर भगाता है. सप्ताह के अंत में मां-बाप उसे स्टारबक्स ले जाते हैं, जहां उसे थर्मल स्कैनर से शरीर का तापमान चेक करवाने में मजा आता है. अंकित के लिए तो कोरोना वायरस के इस दौर में सब कुछ "सामान्य है मगर अपने हाथ को धोते रहना होगा." बाकी दुनिया के लिए मामला इतना आसान नहीं है. जिंदगियां दम तोड़ रही हैं, और सब कुछ उलटा-पुलटा हुआ जा रहा है. भारत में फरवरी में तो कुछ छुट-पुट मामले ही सामने आए लेकिन उसके बाद से यह तेजी से फैला और 20 मार्च तक कोविड-19 संक्रमण के 173 मामले दर्ज हो चुके हैं जबकि चार लोग इसकी वजह से दम तोड़ चुके हैं. इस विषाणु को बड़े पैमाने पर फैलने से रोकने के लिए समूचा देश मानो बंद कर दिया गया, ऐसा अभी तक याददाश्त में नहीं हुआ है. तुर्की समेत 33 यूरोपीय देशों से लोगों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, देश के अंदर भी गैर-जरूरी यात्राएं बड़े पैमाने पर थम गई हैं, कारोबार ठप हो गए हैं, कंपनियों ने कर्मचारियों से घर से ही काम करने को कह दिया है, मॉल और मल्टीप्लेक्स सूने पड़े हैं, हर तरह के आयोजन और शादियां टाल दी गई हैं.

शादी समारोहों को अंजाम देने वाले वेडिंग प्लानर 27 वर्षीय आशीष बोहरा को पिछले हफ्ते बहरीन में अपनी ही शादी रद्द करनी पड़ी. उन्होंने 350 मेहमान और कैलाश खेर सहित 100 मंचीय कलाकार बुलाए थे. वे कहते हैं, "हमारी सारी योजनाएं एक दिन में धराशायी हो गईं." दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र 25 वर्षीय मयंक सागर के सामने भारी वित्तीय संकट है. वे मूवी एडिटिंग फर्म में फ्रीलांसिंग से फीस का इंतजाम करते थे. बॉलीवुड में प्रोडक्शन थमने से उन्हें काम न मिलने की आशंका सता रही है.

पश्चिमी दिल्ली की जिस 68 साल की बुजुर्ग महिला की 14 मार्च को मौत हुई, उनके एक रिश्तेदार के आंसू नहीं रुक रहे थे क्योंकि तन्हाई (क्वारंटीन) में रखे जाने से वे उनसे आखिरी बार बात भी नहीं कर पाए. वे कहते हैं, "हम उन्हें न देख पाए, न उनके मुंह में तुलसी या गंगाजल ही डाल पाए." एचआइवी या सेप्टिसिमिया की मरीजों की तरह ही कोविड-19 से मरने वालों के शव ब्लीच से साफ किए जाते हैं, बॉडी बैग में बंद किया जाता है और दो घंटे के भीतर विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार कर दिया जाता है.

महामारी के साथ दहशत और अफरा-तफरी बढ़ती जा रही है. निजी सुरक्षा के लिए मास्क और हैजमेट सूट के साथ सैनिटाइजर, साबुन और किराना सामग्री की मांग आसमान छू रही है. बिगबास्केट में मांग दोगुनी हो गई है, औसतन ऑर्डर दाम के लिहाज से 20 फीसद बढ़ गए हैं. ग्रोफर्स के प्रवक्ता के मुताबिक, हैंड सैनिटाइजर और हैंड वॉश की मांग क्रमशः400 फीसद और 120 फीसद बढ़ी है. हाल ही में हरियाणा के खाद्य और औषधि विभाग ने नकली सैनिटाइजर बनाने वाले कारखाने का भंडाफोड़ कर 5,000 बोतलें कब्जे में लीं जबकि 2,500 बोतलें पहले ही बिक चुकी थीं. एन99 मास्क देश में खत्म हो चुके हैं जबकि एन95 मास्क दोगुने दाम में बेचे जा रहे हैं. मास्क की कमी दूर करने के लिए केरल सरकार ने कैदियों को कपड़े के ऐसे मास्क बनाने के काम में लगा दिया है जिन्हें धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे करीब 6,000 मास्क सरकार को मिल चुके हैं. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम के कैदियों के बनाए मास्क के पहले बैच की तस्वीर ट्वीट की. एक मास्क की कीमत 15-20 रु. है.

कुछ जगहों पर सामाजिक भेदभाव का कुरूप चेहरा देखने को मिला है. कोच्चि, पुणे और दिल्ली में वर्षों से रह रहे प्रवासियों से कथित तौर पर किराए के घर खाली करने या दुकानों में न आने को कहा जा रहा है. 38 साल के सारंग पाटिल (बदला हुआ नाम) को मुंबई में कल्याण के अपने घर से लगभग बाहर भगा दिया गया, जब पड़ोसियों को पता चला कि वे कोविड-19 से ग्रस्त दुबई से लौटे हैं. वहां वे प्राइवेट कंपनी में काम करते थे. पाटिल ने उन्हें बताने की कोशिश की कि लौटने पर छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनकी जांच हुई थी और उसका नतीजा निगेटिव था लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा. आखिर, वे स्थानीय अस्पताल में गए और जांच फिर निगेटिव आई तब उन्हें घर में जाने दिया गया. देश में पैन एशियन रेस्तरां की श्रृंखला के मालिक पीटर सेंग के मुताबिक, उनके कोच्चि और गुरुग्राम के रेस्तरां में बुकिंग 50 फीसद घट गई है. ग्राहक आश्वस्त होना चाहते हैं कि उनके शेफ चीन से नहीं लौटे हों.

छोटे शहरों और कस्बों में बुजुर्ग लोगों को यह डर सता रहा है कि अगर उनके सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण सार्वजनिक हो गए तो उनका सामाजिक बहिष्कार न हो जाए. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के 63 वर्षीय अजित जैन कहते हैं, "मैं हफ्ते भर से बीमार हूं लेकिन छींक रोके रहता हूं. मैं नहीं चाहता कि लोग मुझे अलग-थलग कर दें. अब मैंने बच्चों को बता दिया है. लखनऊ के अस्पताल वाले भी कह रहे हैं कि यह मामूली सर्दी-जुकाम है. न्यूज में बताते हैं कि यह बीमारी बूढ़ों को लगती है. मैं डरा हुआ हूं कि कहीं मर न जाऊं."

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April 01, 2020