क्यों है जेएनयू में उथल-पुथल

India Today Hindi|January 22, 2020

क्यों है जेएनयू में उथल-पुथल
क्यों है जेएनयू में उथल-पुथल
सोनाली आचार्जी

गत 5 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ( जेएनयू ) में 32 वर्षीया शोध छात्रा अदिति पाटिल के पास पेपर स्प्रे ( मिर्च स्प्रे ) नहीं होता तो नकाबपोश हमलावर ने उनका मुंह लोहे की रॉड के वार से तोड़ दिया होता. हमलावर की आंखों की ओर स्प्रे करने के बाद जान बचाने के लिए अदिति को वाटर कूलर के पीछे छिपना पड़ा. जेएनयू कैंपस में अन्य छात्राएं उनकी तरह भाग्यशाली नहीं रहीं. हथियारों से लैस दर्जनों हमलावरों ने छात्रों और अध्यापकों पर ईंट, बीयर की बोतलों और डंडों से हमला किया. दिल्ली पुलिस हमले को रोक नहीं सकी ( या उसने ऐसा करने से मना कर दिया ). इस हमले में घायल 34 लोगों का एम्स में इलाज किया गया. आठ साल से जेएनयू में रह रहीं पाटिल का कहना है कि कैंपस में ऐसी हिंसक गतिविधियां नहीं होती थीं. वे कहती हैं, " किसी दल से नहीं जुड़ने वाले मेरी तरह के स्टूडेंट्स को निशाना नहीं बनाया जाता था."

जेएनयू के छात्रों के समर्थन में मुंबई , हैदराबाद, केप टाउन, म्यूनिख और न्यूयॉर्क तक से संदेश आए हैं. हमले के खिलाफ मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन करने वाले 500 छात्रों में शामिल आइआइटी, मुंबई के छात्र 21 वर्षीय अभय सिंह कहते हैं," सरकार ने छात्रों का विश्वास तोड़ा है. हमलावर आराम से परिसर से निकल गए और उल्टे पीड़ितों के खिलाफ ही प्रथमिकी दर्ज की जा रही है."

जेएनयू छात्र संघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) हिंसा के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. छात्र संघ का कहना है कि एबीवीपी के लोग कुलपति एम. जगदीश कुमार से मिले हुए हैं. छात्र संघ के काउंसलर अनघ प्रदीप कहते हैं," वे यह साबित करने आए थे कि हम प्रशासन के संरक्षण में कैंपस में तुम्हें पीट कर साफ बच निकल सकते हैं."

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January 22, 2020