कोलकाता के चाइना टाउन पर सीमा विवाद की छाया

Gambhir Samachar|July 01, 2020

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कोलकाता के चाइना टाउन पर सीमा विवाद की छाया
तब युद्ध के दौरान और उसके बाद उपजे हालात की वजह से हजारों की तादाद में यहां के चीनी विदेशों में बस गए थे. यहां रहने वाले ज्यादातर लोग यहीं पैदा हुए हैं और कभी चीन नहीं गए हैं.

चीनी मूल के भारतीय होने के कारण दोनों देशों के बदलते आपसी रिश्तों का इन पर खासा असर पड़ता है. बीती फरवरी में चीन में कोरोना का संक्रमण तेज होने के बाद लजीजी चीनी व्यंजनों के लिए मशहूर इस इलाके के रेस्तराओं में अचानक ग्राहकों का आना थम गया था. लगभग चार महीने बाद भी हालात जस के तस हैं. बीती फरवरी से ही चीनी मूल के लोगों को कोरोना वायरस कहा जाने लगा था. आम तौर पर बुद्धिजीवी वर्ग में शुमार कोलकाता का बंगाली समुदाय भी इस मामले में संकीर्णता का परिचय दे रहा है. पहले यहां के लोगों को कोरोना वायरस कहा गया और अब चीन के साथ विवाद बढ़ने पर भी स्थानीय लोगों ने अपनी निगाहें टेढ़ी कर ली हैं.

सहमे हुए हैं चीनी मूल के लोग

चाइना टाउन में रहने वाले लोग बीते सप्ताह से ही सहमे हुए हैं. अभी कोरोना का कहर थमा भी नहीं है कि अब सीमा विवाद और सैनिकों की मौत की खबरें सामने आ गई हैं. इलाके में एक रेस्तरां चलाने वाले जॉन ली कहते हैं, '1962 की लड़ाई के समय मैं नौ साल का था. तब हमारे घरों पर पथराव हुआ था और लोगों ने हमें भारत छोड़ने की धमकी दी थी. मेरे दादा, पिता और चाचा को जेल में डाल दिया गया था. मां मुझे और छोटे भाई को लेकर दार्जिलिंग चली गई थी. हम नहीं चाहते कि दोबारा ऐसा हो. अब भारत ही हमारा देश है. इंडियन चाइनीज यूथ एसोसिएशन के पी चुंग कहते हैं,' 1962 की लड़ाई ने यहां सब कुछ बदल दिया. हम नहीं चाहते कि वैसे हालात दोबारा पैदा हों.'

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July 01, 2020