बड़ी सौगात होगी यूपी की फिल्म सिटी
DASTAKTIMES|September 2020
बड़ी सौगात होगी यूपी की फिल्म सिटी
राजनीतिक लिहाज से भी यूपी में देश की सबसे खूबसूरत फिल्म सिटी की स्थापना करने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल को एक बड़ा दांव माना जा रहा है। पहले डिफेंस कॉरिडोर और अब फिल्म सिटी की स्थापना से रोजगार के काफी अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और उत्तर भारत के कलाकारों को बेहतर माहौल के साथ उचित प्लेटफॉर्म मिल सकेगा। हिंदी हार्टलैंड में हिंदी फिल्में बन सकेंगी। प्रशिक्षण केंद्र भी खुलेगा जहां युवा प्रशिक्षित किए जा सकेंगे। युवाओं के लिए यह बड़ी खुशी की बात है।
राम कुमार सिंह

नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे की 1000 एकड़ जमीन पर होगा निर्माण

यूं तो लगभग हर सरकार में उप्र में फिल्म सिटी बनाने की बात हुई। कुछ बैठकें भी हुईं, बॉलीवुड और कॉलीवुड से जुड़े लोग भी आये, चर्चा भी खूब हुई लेकिन धरातल पर कुछ उतरता नहीं दिखा, लेकिन अब सूबे की योगी सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रदेश सरकार और उसके मुखिया योगी आदित्यनाथ के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि इस बार फिल्म सिटी हवाहवाई योजना नहीं बल्कि धरातल पर आकार लेगी। यही वजह है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म सिटी बनाने की घोषणा की तो उसे फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों ने बेहद गंभीरता से लिया। सिने जगत से जुड़े लोग इसे उत्तर भारत के लिए एक बड़ी सौगात मान रहे हैं। दरअसल यूपी में फिल्म सिटी के लिए काफी संभावनाएं हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यूपी में फिल्म सिटी बनने से प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत के नए कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर तो मिलेगा ही उन्हें भेदभाव का शिकार भी नहीं होना पड़ेगा। फिल्म निर्माता-निर्देशकों को शूटिंग के लिए प्रदेश में स्थित ऐतिहासिक इमारतों के अलावा यहां का माहौल खासा मुफीद लगता है। आगरा का ताजमहल, लाल किला, फतेहपुर सीकरी का किला, मथुरा, वृन्दावन और आसपास का इलाका भी उन्हें लुभाता है। ऐसे में नोएडा के यमुना एक्सप्रेस-वे के इर्द-गिर्द फिल्म सिटी बनने से निर्माता-निर्देशकों को प्रदेश में उनकी पसंदीदा जगहों शूटिंग करने में विशेष सुविधा रहेगी।'


लखनऊ, वाराणसी और आगरा तक होगा फिल्म सिटी का विस्तार

नोएडा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक बड़ी फिल्म सिटी बनाने के साथ लखनऊ, वाराणसी और आगरा आदि शहरों में छोटे आकार की फिल्म सिटी स्थापित होने की संभावना बनी है। इन स्थानों पर 200-250 एकड़ में स्माल फिल्म सिटी बनाने की योजना लाई जा सकती है। जानकारी के अनुसार आगरा में पहले से ही एक फिल्म सिटी का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए यूपीसीडा ने जमीन भी चिन्हित कर ली थी। सरकार द्वारा इस परियोजना का परीक्षण भी कराया जा रहा है। सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में पर्यटन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर फिल्म सिटी बनाने के संबंध में अध्ययन कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आसपास भी फिल्मसिटी स्थापित करने के लिए जगह की तलाश जारी है।

इस सबके अलावा राज्य सरकार के पास पहले से ही फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने की एक मजबूत नीति मौजूद है। इस फिल्म नीति के तहत प्रदेश में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई सहूलियतें दी जा रही हैं। प्रदेश में बनने वाली हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों को लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम दो करोड़ रुपये अनुदान दिया जाता है। साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। फिल्म में अगर प्रदेश के पांच कलाकार हैं तो 25 लाख रुपये अतिरिक्त व सभी कलाकार प्रदेश के हैं तो 50 लाख रुपये अतिरिक्त देने का प्रावधान है। इसके अलावा शूटिंग की अनुमति के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में कमेटी गठित है। पर्यटन विभाग के होटलों व अन्य संपत्तियों में 25 प्रतिशत छूट की व्यवस्था है। सरकार की संस्था फिल्म बंधु के मुताबिक प्रदेश में डेढ़ करोड़ से लेकर 40-50 करोड़ रुपये तक के बजट की फिल्मों का निर्माण पहले से ही हो रहा है। योगी सरकार में 2017 से लेकर अब तक 38 फिल्मों को लगभग 21 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है।

माना जा रहा है कि जल्द ही यूपी न सिर्फ हिंदी बल्कि देश-विदेश की अन्य भाषाओं के फिल्म निर्माण का बड़ा हब बनकर उभर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से यूपी बॉलीवुड के फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों व कलाकारों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना है।

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