भारत के कौशल विकास को औद्योगिक संस्थानों से जोड़ने की चुनौतियां
DASTAKTIMES|September 2020
We're offering this story for free to read so that you can stay updated on the COVID-19 outbreak
भारत के कौशल विकास को औद्योगिक संस्थानों से जोड़ने की चुनौतियां
कोरोना महामारी से उपजे संकट को भारत में कौशलीकरण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के अवसर के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। कौशल प्रशिक्षण के अंतराल को कम करने के लिए प्रमुख कदम हैं जैसे आरंभ में प्रशिक्षु 1-3 साल की अवधि के लिए नौकरी के साथ-साथ कौशल भी करते हैं। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना के माध्यम से इसका समर्थन करती है और 25 प्रतिशत वजीफा देती है। ऐसे अप्रैटिसशिप कार्यक्रमों को प्रशिक्षुता पखवाड़ा जैसे जागरूकता अभियानों के माध्यम से मजबूत किया जाना चाहिए।
विनय सिंह

भारत में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान, सेक्टर स्किल काउंसिल और निजी प्रशिक्षण केंद्र, कौशल प्रशिक्षण का कार्य करने वाले संस्थान हैं। इन संस्थानों का संचालन कोविङ19 महामारी के कारण बंद पड़ा है। इससे लगभग एक करोड़ लोगों को कौशल प्रशिक्षण से वंचित रहना पड़ रहा है और उनके रोजगार की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। कौशल प्रशिक्षण के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ साझेदारी की है लेकिन, कौशल प्रशिक्षण का उद्योगों के साथ जुड़ाव न होने की समस्या अभी भी संरचनात्मक रूप में विद्यमान है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य देश में कुशल श्रमशक्ति की जरूरत को पूरा करना है। वर्तमान में देश भर में 15,000 आईटीआई हैं और इनमें 11,000 आईटीआई निजी क्षेत्रा से संबद्ध हैं। 15,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और निजी अल्पकालिक प्रशिक्षण केन्द्रों सहित व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान, जो सालाना 10 मिलियन से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करते हैं किन्तु कोविड-19 के कारण यह सभी संस्थान मार्च 2020 से बंद हैं।

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

September 2020