क्या अब मंदिर राजनीति नया मोड़ लेगी
DASTAKTIMES|August 2020
क्या अब मंदिर राजनीति नया मोड़ लेगी
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी पर्याप्त संकेत दिए। उन्होंने कहा कि राम समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं। वे परिवर्तन और आधुनिकता के पक्षधर हैं। उन्हीं के आदर्शों के साथ भारत आगे बढ़ रहा है। विपक्ष और खासकर कांग्रेस ने जो प्रतिक्रियाएं दी हैं, वे मंदिर निर्माण और उससे जुड़े भूमि पूजन की पक्षधर रहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी दोनों ने लगभग एक जैसी बात कही है। श्रीमती गांधी ने दो दिन पहले एक लम्बे बयान में कहा था ‘राम सब में हैं, राम सबके साथ हैं। भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।
ज्ञानेन्द्र शर्मा

अगस्त की 5 तारीख मंदिर आंदोलन के लम्बे संघर्षों की क्या चरम परिणति है? तो क्या अब मंदिर से जुड़े मामले राजनीति को नई दिशा देंगे? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूमि पूजन के समय मंदिर आंदोलन का उन्मादी नारा "जय श्रीराम मंच से नहीं लगाया और उसके स्थान पर बार बार "जय सियाराम का उद्घोष किया।" जय श्रीराम का नारा नब्बे के दशक से संघ परिवार के मंदिर आंदोलन का जीवंत व जुझारू नारा था। तो क्या अब यह मान लेना चाहिए कि मोदी जी अब इस जुझारूपन की आवश्यकता नहीं समझते और चाहते हैं कि 15 अगस्त की तरह सब मिलजुल कर 5 अगस्त को भी एक पावन दिवस की तरह मनाएं। उन्होंने कहा भी कि 'जिस तरह स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक 15 अगस्त का दिन है, उसी तरह कई पीढ़ियों के अखण्ड और एकनिष्ठ प्रयासों का प्रतीक पांच अगस्त का दिन है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी पर्याप्त संकेत दिए। उन्होंने कहा कि राम समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं। वे परिवर्तन और आधुनिकता के पक्षधर हैं। उन्हीं के आदर्शों के साथ भारत आगे बढ़ रहा है। विपक्ष और खासकर कांग्रेस ने जो प्रतिक्रियाएं दी हैं, वे मंदिर निर्माण और उससे जुड़े भूमि पूजन की पक्षधर रहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी दोनों ने लगभग एक जैसी बात कही है। श्रीमती गांधी ने दो दिन पहले एक लम्बे बयान में कहा था 'राम सब में हैं, राम सबके साथ हैं। भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने। प्रधानमंत्री ने 5 अगस्त को भूमि पूजन के बाद कहा 'राम हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं। राम मंदिर हमारी शाश्वत संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प शक्ति का प्रतीक बनेगा।

तो भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एक ही पन्ने पर हैं, एक ही धरातल पर हैं। मंदिर के लम्बे संघर्षों, आपसी टकरावों, सत्ता व विपक्ष के कटु मुकाबलों और ऐतिहासिक झंझावातों के बाद यह पहला अवसर है जब देश के दो सर्व प्रमुख दलों के बीच उस मुद्दे पर वैचारिक समानता बन रही है, जिसने गोलियां चलवाई हैं, राजनीतिक व धार्मिक वैमनस्यता चरम पर पहुंचाई है, दंगे कराए हैं और रचुनाव हराए वजिताए हैं। इसे तमाम विश्लेषक भविष्य की राजनीति के लिए बहुत बड़ा शुभ संकेत मान रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

August 2020