या वैक्सीन तेरा सहारा!
DASTAKTIMES|August 2020
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या वैक्सीन तेरा सहारा!
भारत में भी वैज्ञानिक पूरी शिद्दत से शोध में जुटे हुए हैं। दर्जनों क्लीनिकल ट्रायल हो रहे हैं और कुछ देशों में ये ट्रायल दूसरे फेज में पहुंच भी चुके हैं। काफी को उम्मीद है कि साल के अंत तक एक वैक्सीन तैयार हो सकती है लेकिन वैक्सीन को लेकर तमाम सवाल भी हैं जिनके उत्तर आने में अभी बहुत समय लगने वाला है। वहीं बाजार में आने के बाद यह वैक्सीन किसे पहले उपलब्ध होगी और किसे बाद में, इसे लेकर भी चर्चायें और आशंकायें समान रूप से हैं। इतना तो तय है कि वैक्सीन के सफल प्रयोग के बाद आमधारणा यह बन जायेगी।
जितेन्द्र शुक्ल

कोविड-19 यानि कोरोना वायरस ने पूरी विश्व में तबाही मचा रखी है। इस महामारी से विश्व की करीब 900 करोड़ की जनसंख्या हलकान है। एक ओर जहां लोगों की जाने जा रही हैं तो वहीं तमाम मुल्कों की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गयी है। यहां तक कि इस वायरस के कथित जनक चीन भी इससे अछूता नहीं रहा है। दिसम्बर के अंत से शुरु हुई यह महामारी अब अपने चरमोत्कर्ष पर है। लगातार सक्रमितों की संख्या बढ़ रही है और मौतों का आंकड़ा भी। लगभग सभी देश अपने-अपने तरीकों से इस रोग से मुक्ति पाने की चेष्टा कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोई भी यह दावा नहीं कर सका कि उसने इस महामारी पर विजय प्राप्त कर ली है। कोरोना वायरस से सक्रमित रोगी को कोई भी दवा असर नहीं कर रही है। यही वजह है कि विश्वभर के वैज्ञानिक अपने-अपने देशों में वैक्सीन पर शोध करने में जुटे हुए हैं। कई देशों ने यह दावा भी किया है कि उन्होंने वैक्सीन तैयार कर ली है और अब उसका मानवीय परीक्षण चल रहा है। आम लोगों को भी अब वैक्सीन का ही सहारा है। भारत में भी वैज्ञानिक पूरी शिद्दत से शोध में जुटे हुए हैं। दर्जनों क्लीनिकल ट्रायल हो रहे हैं और कुछ देशों में ये ट्रायल दूसरे फेज में पहुंच भी चुके हैं। काफी को उम्मीद है कि साल के अंत तक एक वैक्सीन तैयार हो सकती है लेकिन वैक्सीन को लेकर तमाम सवाल भी हैं जिनके उत्तर आने में अभी बहुत समय लगने वाला है। वहीं बाजार में आने के बाद यह वैक्सीन किसे पहले उपलब्ध होगी और किसे बाद में, इसे लेकर भी चर्चायें और आशंकायें समान रूप से हैं। इतना तो तय है कि वैक्सीन के सफल प्रयोग के बाद आमधारणा यह बन जायेगी कि अब यह महामारी मानवजाति का ज्यादा कुछ बिगाड़ नहीं पायेगी। लोगों की यह सकारात्मक सोच उन्हें अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी क्योंकि फिलहाल सभी के मन में इस बीमारी को लेकर खौफ बैठा हुआ है। एक ओर जहां वैक्सीन को लेकर विश्व में शोध हो रहे हैं वहीं यह भी खबर है कि कोरोना वायरस ने पिछले कुछ महीनों में खुद में बदलाव कर लिया है और अब ये दुनिया में नई-नई किस्मों (वायरस के स्ट्रेन) में उभर और फैल रहा है। अकेले भारत में ही इस वायरस की तीन किस्में पाई गई हैं-पहला चीन के वुहान से निकली किस्म, दूसरा यूरोप के इटली में मिली किस्म और तीसरा ईरान वाली वैरायटी।

शोधकर्ताओं का मानना है कि विश्व के कई देशों में तेजी से फैल रहा कोविड-19 का संक्रमण यूरोपीय स्ट्रेन (किस्म) का है और ये वो किस्म है जो फरवरी के महीने में इटली में सामने आया था। यह भी कहा जा रहा है कि कोरोना की यूरोपीय किस्म चीन के वुहान से निकले वायरस से अधिक शक्तिशाली है। मगर शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे ये साबित नहीं होता कि यूरोपीय वैरायटी वाले स्ट्रेन से हुआ संक्रमण ज्यादा घातक होगा। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भी भारत में सामने आए वायरस की किस्मों पर रिसर्च की बात कही है। साथ ही ये भी कहा है कि कोरोना वायरस की अलग-अलग वैरायटी के सामने आने का ये अर्थ नही है कि ये डेवलप हो रही है वैक्सीन की गुणवत्ता को किसी तरह कम कर देगा। आईसीएमआर के डॉ. रमन गंगाखेड़कर ने कहा था कि वायरस के नए किस्म से वैक्सीन निष्प्रभावी नहीं होगा। हालांकि वायरस के किस्मों पर भी शोध किया जा रहा है।

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