सृजनात्मकता, डिजिटलीकरण और बच्चे
DASTAKTIMES|August 2020
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सृजनात्मकता, डिजिटलीकरण और बच्चे
सर्वे में पाया गया कि 65 प्रतिशत बच्चे लॉकडाउन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आदी बन गए हैं और 50 प्रतिशत बच्चे तो आधे घंटे के लिए भी इन उपकरणों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस लत से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे इनके प्रयोग से ज्यादा जिद्दी और चिड़चिड़े हो गए हैं। उनकी भाषिक कुशलता, आलोचनात्मक शक्ति और विश्लेषणात्मक क्षमता तेजी से घटी है। दो तिहाई अभिभावकों ने माना कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपने बच्चों के जीवनव्यवहार में भारी बदलाव देखे हैं।
सर्वेश कुमार मौर्य

हाल ही में जयपुर जे के लोन चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक सर्वे किया। 25 मार्च से लेकर मई माह के अंत तक के लॉकडाउन पर आधारित इस सर्वे में लॉकडाउन के दौरान बच्चों के जीवन व व्यवहार में आए बदलावों का अध्ययन किया गया। इस सर्वे में पाया गया कि लॉकडाउन ने बच्चों के जीवनव्यवहार को बदल दिया है। इस परिघटना ने उनके शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य को खासा प्रभावित किया है।

सर्वे में पाया गया कि लॉकडाउन के दौरान बच्चों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग में लत की हद तक भारी वृद्धि हुई है। 1 जून से लेकर 15 जून तक चले इस ऑनलाइन सर्वे में कुल 203 सैम्पल लिए गए थे। इसमें जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, अलवर, कोटा, गंगानगर, सीकर, चुरू, नागौर और भरतपुर को राजस्थान राज्य से शामिल किया गया और अन्य राज्यों में दिल्ली, दिल्ली एनसीआर, कोलकाता, मुम्बई, आगरा, चंडीगढ़ और लखनऊ को शामिल किया गया। इस सर्वे के परिणाम कई मायने में चौंकाने वाले, चिंताजनक व महत्वपूर्ण हैं।

सर्वे में पाया गया कि 65 प्रतिशत बच्चे लॉकडाउन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आदी बन गए हैं और 50 प्रतिशत बच्चे तो आधे घंटे के लिए भी इन उपकरणों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस लत से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे इनके प्रयोग से ज्यादा जिद्दी और चिड़चिड़े हो गए हैं। उनकी भाषिक कुशलता, आलोचनात्मक शक्ति और विश्लेषणात्मक क्षमता तेजी से घटी है। दो तिहाई अभिभावकों ने माना कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपने बच्चों के जीवन-व्यवहार में भारी बदलाव देखे हैं। ज्यादातर बच्चों में अनिद्रा, थकान, सरदर्द, चिड़चिड़ापन, मोटापा व कमरदर्द आदि की शिकायतें बढ़ी हैं।

45 प्रतिशत बच्चों में अनिद्रा की भयंकर शिकायतें देखी गई। 7 प्रतिशत बच्चों में सोने के वक्त बिस्तर में चिड़चिड़ापन महसूस किया गया। 32 प्रतिशत बच्चे अपने गुस्से को काबू कर पाने में अक्षम देखे गए। 33 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों में ऑनलाइन क्लासेस से किसी भी किस्म का इंप्रूवमेंट नहीं देखा। 19 प्रतिशत का कहना था कि इस किस्म की ऑनलाइन क्लासेस का स्तर पहले की स्कूली क्लासरूम वाली शिक्षण पद्धति के मुकाबले काफी नीचे था।

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