कोरोना महामारी से मानवता व्यथित
DASTAKTIMES|July 2020
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कोरोना महामारी से मानवता व्यथित
प्रशान्त चित्त उर्वर होता है। ऐसे चित्त में मधुप्रीति उगती है। यहीं मधुमयता की गाढ़ी अनुभूति मिलती है। कोई कह सकता है कि शान्ति एक अमूर्त विचार है। एक कल्पना या धारणा। मनोविज्ञान की दृष्टि में चित्त की एक विशेष दशा- स्टेट आफ माइंड का नाम शांति है। शांति किसी भी पदार्थ या वस्तु से अधिक मूल्यवान है। शान्ति सकारात्मक स्थिति है। अशान्ति का न होना शान्ति नहीं है। अशान्ति भिन्न चित्तदशा है। अशान्त लोग अपने प्रिय भौतिक पदार्थ और वस्तुएं भी तोड़ने लगते हैं। वे अपना माथा भी पीटते हैं। प्रशांत लोग कुर्सी, कप या मेज को भी प्रीति प्यार से सहलाते हैं, वस्तुएं तब मित्र या जीवंत प्राणी होती हैं।
हृदय नारायण दीक्षित

विश्व अशांत है। कोरोना महामारी से विश्व मानवता पर व्यथित है। दुनिया भयग्रस्त है। मृत्यु सामने है। चिकित्सा विज्ञान के सामने अभूतपूर्व चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी संकट में है और अशांत है। इस सबके बावजूद चीन और अमेरिका आमने सामने हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी कोरोना की चिंता नहीं करते। वे भी सक्रिय हैं। अमेरिका में पुलिस ने निर्दोष अश्वेत की हत्या की। दुनिया को मानवाधिकार का पाठ पढ़ाने वाले अमेरिका में कयूं है। प्रकृति के घटक अशांत हैं। अंतरिक्ष तक अशांति का वातावरण है। प. बंगाल में भयानक तूफान आया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दौरा किया। राहत की घोषणा हुई कि मुम्बई में भी तूफान ने धावा बोला। टिड्डी दल ने भी हमले के लिए यही आपातकाल चुना। प्रसन्नता देने वाली खबरों का अकाल है। चित्त उद्विग्न है। दुनिया तनावग्रस्त है। कहते हैं कि आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों के चलते दुनिया ग्लोबल-विलेज या विश्व ग्राम बन गई है। निस्संदेह तकनीकी ने भौगोलिक दूरी को समय के आयाम में घटाया है। माना जाता है कि समय की बचत हो रही है। लेकिन वास्तविक अनुभूति ऐसी नहीं है। तमाम सुविधाओं के बावजूद आधुनिक मनुष्य के पास समय की कमी है। चित्त की शांति का अता पता नहीं । मानव मन बेचैन है। निद्रा घटी है। अनिद्रा के रोगी बढ़े हैं। अशांति भूमण्डलीय यथार्थ है। जो समृद्ध हैं वे समृद्धि के कारण अशांत हैं और जो अभावग्रस्त हैं, वे अभाव की व्यथा में अशांत हैं। वैदिक काल का समाज प्रकृति के प्रति आदर भाव से युक्त था। शांति सहज उपलब्ध थी। शांत चित्त में ही रसपूर्ण ज्ञानपूर्ण वैदिक साहित्य व उल्लासपूर्ण समाज का विकास हुआ था।

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