ड्रैगन की नापाक हरकतें और भारत की जवाबी कार्रवाई की रणनीति
DASTAKTIMES|July 2020
ड्रैगन की नापाक हरकतें और भारत की जवाबी कार्रवाई की रणनीति
पूर्वी लद्दाख में अभी तक तीन डिवीजन थीं। इस चौथी डिवीजन से सेना की ताकत और बढ़ जाएगी। भारतीय प्रधानमंत्री के नीमू (लेह) दौरे के दौरान ही डिवीजन के कई अफसरों और जवानों ने नई जिम्मेदारी संभाल ली है। 2008 में जिस चीन ने भारत के साथ सैन्य विश्वास निर्माण बहाली के लिए हैंड इन हैंड मिलिट्री एक्सरसाइज की शुरुआत की थी, उसी चीन ने 2020 में हैंड इन हैंड टसल या कॉन्फ्लिक्ट के जरिए भारत के एक कर्नल सहित 20 जवानों की ही हत्या नहीं कर दी।
विवेक ओझा

भारत और चीन के तनावपूर्ण संबंध और उससे उभरे विवादों पर पूरी दुनिया की निगाह रहती है। जब भी ये विवाद उभरते हैं तो विदेश नीति के मानक सिद्धांतों के अनुरूप शांति वार्ताओं के जरिए जल्द से जल्द द्विपक्षीय स्तर पर समाधान ढूंढने की कोशिश की जाती है लेकिन इस बार कुछ ऐसा हो रहा है जैसा आमतौर पर नहीं देखा जाता। वार्ता पर तो भारत ने पहले की तरह ही ध्यान केंद्रित किया है लेकिन इसके साथ ही अपने प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूती देते हुए भारत चीन सीमा पर सुरक्षा चौकसी और इंतजामों को मजबूती देना शुरू कर दिया है। चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी मजबूत करने के लिए सेना ने जहां अपनी एक और डिवीजन तैनात कर दी है। वहीं वायुसेना के विमानों से भारी भरकम सैन्य साजो सामान पहुंचाने का काम काफी तेजी से चल रहा है। इसके अलावा लड़ाकू विमानों एसयू-30-एमकेआई और मिग-29 ने भी कई उड़ानें भर कर चीन को अपना संदेश दिया है। पूर्वी लद्दाख में अभी तक तीन डिवीजन थीं। इस चौथी डिवीजन से सेना की ताकत और बढ़ जाएगी। भारतीय प्रधानमंत्री के नीमू (लेह) दौरे के दौरान ही डिवीजन के कई अफसरों और जवानों ने नई जिम्मेदारी संभाल ली है।

2008 में जिस चीन ने भारत के साथ सैन्य विश्वास निर्माण बहाली के लिए हैंड इन हैंड मिलिट्री एक्सरसाइज की शुरुआत की थी, उसी चीन ने 2020 में हैंड इन हैंड टसल या कॉन्फ्लिक्ट के जरिए भारत के एक कर्नल सहित 20 जवानों की ही हत्या नहीं कर दी बल्कि उस सैन्य विश्वास बहाली की हत्या कर दी जिसकी दुहाई चीन देता रहा है कि हम भी युद्ध नहीं चाहते, शांति की राहें हम दोनों को खोजनी होगी। चीन ने अपनी इस कायराना हरकत के जरिए सिद्ध कर दिया है कि वह वैदेशिक संबंधों और अन्य मामलों में भी मोरल टर्पिट्यूड (नैतिक अधमता) का शिकार हो चुका है। एक बार फिर चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति और धूर्त इरादों को सार्वजनिक कर दिया। पहले तो भारत की सीमा में अतिक्रमण किया फिर आपत्ति दर्ज कराने पर भारत पर ही आरोप लगाया कि आप अवैध रूप में घुसपैठ कर रहे। दबाव दिया गया तो पीछे हटने का आश्वासन दिया और फिर अब जब भारतीय कमांडिंग ऑफिसर इस मुद्दे पर चीन के अपने कॉउंटरपार्ट से मिलने गए तो न केवल भारतीय सेना पर हमला हुआ, बल्कि सीओ रैंक के अधिकारी सहित अन्य भारतीय सैनिक शहीद हुए हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में चीन की सेना में भी नुकसान होने की खबरें आईं। और तो और कितना अजीब घटनाक्रम है कि चीन की सेना ही अतिक्रमण करती है फिर डंडों और पत्थर के साथ पूरी तैयारी से भारतीय सैनिकों पर हमला करती है और जब इस पर भारत की प्रतिक्रिया आती है तो उल्टा चीन भारत पर ही आरोप लगा रहा कि आप घुसपैठ कर रहे हैं। क्या बात है उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, वही हाल हो गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर बार बार चीन इस तरह की हरकतें कर रहा तो क्या निष्कर्ष निकाला जाए कि क्या चीन भारत से युद्ध की तैयारी में लगा है? या युद्ध की स्थितियां बिल्कुल बन चुकी है और कभी भी युद्ध का शंखनाद हो सकता है ?

कुछ मीडिया चैनल को देखें तो लगता है कि युद्ध मानो शुरू हो ही गया है। फिलहाल युद्ध की सम्भावनायें नहीं है क्योंकि न तो भारत और न ही चीन युद्ध के इच्छुक होंगे। अगर ऐसा कहा जा रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि वर्तमान समस्या की गम्भीरता से हम परिचित नहीं हैं, बल्कि ऐसा कहने के पीछे कई तर्क भी है पर यहां दो मुख्य कारण का ही उल्लेख उचित होगा-

दोनों ही देश नाभिकीय शक्ति सम्पन्न देश है और सैन्य दृष्टि से दोनों ही देशों की सेना बड़ी और अत्याधुनिक हथियारों से लैश है। ऐसे में दोनों ही जानते हैं कि इनके बीच युद्ध का परिणाम इनमें से किसी भी देश के पक्ष में नहीं जाने वाला बल्कि दोनों ही इस तरह विनाश को ही आमंत्रित करेंगे। आज के भूअर्थ प्रधान युग में सुपर पावर का मतलब सैन्य ताकत से अधिक आर्थिक ताकत के होने से है। यही कारण है कि अब सैन्य युद्ध के बजाय व्यापारिक युद्ध की प्रवृत्तियां अधिक देखने को मिलती है। दोनों ही देश पिछले कुछ दशकों से आर्थिक रूप मजबूत हुए हैं। यहां तक कि 21वीं सदी को इन्हीं दोनों देशों के कारण एशियाई सदी के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही दोनों ही देशों की एक विशाल आबादी भी है।

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