यूपी में राहुल की नाकामयाबी के दाग धोती प्रियंका
DASTAKTIMES|July 2020
यूपी में राहुल की नाकामयाबी के दाग धोती प्रियंका
पिछले 30-32 वर्षों से कांग्रेसी सड़क पर संघर्ष करते दिखते ही कहां थे। चाटुकारिता के बल पर लोग पार्टी में बड़े-बड़े पदों पर आसानी हो जाया करते थे, जिन्होंने पार्टी का बेड़ा गर्क करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उत्तर प्रदेश से राहुल गांधी की 'विदाई' और प्रियंका की 'इंट्री' कांग्रेस के लिए शुभ मानी जा रही है। पार्टी का बदला मिजाज देखकर कांग्रेसी विचारधारा के वह लोग काफी खुश नजर आ रहे हैं, जो वर्षों से यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि एक न एक दिन प्रदेश में कांग्रेस पुरानी पहचान हासिल कर लेगी। प्रियंका जिस तरह से मिशन उत्तर प्रदेश को पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है, उसको देखते हुए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
अजय कुमार

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका वाड्रा यूपी में काफी 'मेहनत' कर रही हैं। यह मेहनत प्रियंका की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में आज की तारीख में प्रियंका वाड्रा अकेली ऐसी नेता हैं जो ‘ड्राइंग रूम' से निकल कर सड़क पर संघर्ष करते नजर आ रही हैं। वर्ना पिछले 30-32 वर्षों से कांग्रेसी सड़क पर संघर्ष करते दिखते ही कहां थे। चाटुकारिता के बल पर लोग पार्टी में बड़े-बड़े पदों पर आसानी हो जाया करते थे, जिन्होंने पार्टी का बेड़ा गर्क करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उत्तर प्रदेश से राहुल गांधी की 'विदाई' और प्रियंका की 'इंट्री' कांग्रेस के लिए शुभ मानी जा रही है। पार्टी का बदला मिजाज देखकर कांग्रेसी विचारधारा के वह लोग काफी खुश नजर आ रहे हैं, जो वर्षों से यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि एक न एक दिन प्रदेश में कांग्रेस पुरानी पहचान हासिल कर लेगी। प्रियंका जिस तरह से मिशन उत्तर प्रदेश को पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है, उसको देखते हुए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कांग्रेस 2022 में प्रियंका को उत्तर प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर दे। कांग्रेस के भीतर से भी इस तरह की आवाजें उठने लगी हैं। चर्चा तो यह भी है कि प्रियंका वाड्रा की एसपीजी सुरक्षा हटाने और सरकारी बंगला खाली किए जाने की नोटिस मिलने के बाद प्रियंका दिल्ली वाला बंगला खाली करके लखनऊ में स्थायी रूप से 'डेरा' डाल सकती हैं ताकि मनौवैज्ञानिक रूप से कांग्रेसियों का मनोबल बढ़ाया जा सके। प्रियंका पूर्व कांग्रेसी नेता दिवंगत शीला कौल वाले बंगले में शिफ्ट हो सकती हैं।

खैर, बात प्रियंका द्वारा उत्तर प्रदेश में बिछाई गई चुनावी बिसात की की जाए तो प्रियंका ने 2022 के विधान सभा चुनाव की तैयारी बीते वर्ष लोकसभा चुनाव के समय से शुरू कर दी थी और आज की तारीख में वह काफी आगे बढ़ चुकी हैं। जहां सपा-बसपा अभी 2022 विधान सभा चुनाव के बारे में सोच भी नहीं रहे हैं, वहीं प्रियंका सधे हुए कदमों से 2022 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही हैं। 2022 का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रियंका ने पुराने चेहरों को साइडलाइन करके अपनी पसंद की टीम तैयार कर ली है। प्रदेश से लेकर जिला और नगर इकाइयों तक पर उनकी नजर है। कोरोना काल में प्रियंका जिस तरह की सियासत कर रही हैं उसकी 'टाइमिंग' पर सवाल उठाये जा सकते हैं, लेकिन प्रियंका के जज्बे को तो 'सलाम' करना ही पड़ेगा, जो कोराना से निपटने के लिए जद्दो- जहद कर रही योगी सरकार को लगतार आईना दिखाने का काम कर रही है। बिना इन आरोपों की चिंता किए कि कोरोना काल में भी गांधी परिवार घटिया सियासत कर रहा है। जब कोरोना के चलते देश लॉकडाउन था। जनता सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रही थी। चेहरे पर मास्क और सैनिटाइजर्स के जरिए लोग कोरोना संक्रमण से जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। देश में लगातार कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़ती जा रही थी। तब प्रियंका हर उस मुद्दे को हवा दे रही हैं, जो योगी सरकार की पेशानी पर बल डाल सकता था। प्रियंका आगे-आगे तो उनकी पार्टी के दूसरी-तीसरी लाइन के युवा नेता कंधे से कंधा मिलाकर पीछे-पीछे चलते नजर आते हैं। प्रियंका के साथ संघर्षरत नेताओं में कोई पुराना चेहरा नजर नहीं आता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय 'लल्लू' और उनके ही जैसे अन्य गुमनाम या कम जाने-पहचान वाले संघर्षशील युवा नेताओं के सहारे प्रियंका, योगी सरकार के खिलाफ कई ऐसे मुद्दे उछाल चुकी है जिसको लेकर योगी सरकार को बार-बार सफाई तक देना पड़ा तो प्रियंका पर कोरोना काल में घटिया राजनीति करने का आरोप भी लगा।

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