रिश्तों में बढ़ती दिक्कतों को कैसे सुलझाएं
Mukta|October 2020
रिश्तों में बढ़ती दिक्कतों को कैसे सुलझाएं
ऐसा कोई रिश्ता नहीं जिस में समय के साथसाथ समस्याएं पैदा न हों. आप चाहे शादीशुदा हों या चाहे लव रिलेशनशिप में हों, कुछ न कुछ अपवाद होते ही हैं. ऐसे में कई बार गुस्से और हताशा के चलते लिए गए बहुत से निर्णय आप के रिश्ते को खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं.

उस दिन रितेश की छोटी बहन की शादी थी जब पहली बार रितेश की कुसुम से मुलाकात हुई थी. कुसुम रितेश की दूर की रिश्तेदारी से थी. लेकिन कब शादी की मजाकमस्ती में वे एकदूसरे के करीब आ गए, इस का उन्हें पता ही नहीं चला. यह जानते हुए कि इस रिश्ते को भविष्य में परिवार वाले एक्सैप्ट नहीं करेंगे, इस के बावजूद वे खुल कर एकदूसरे से बात करते रहे. शुरू में उन्हें खुद इस रिश्ते के इतने आगे बढ़ जाने का एहसास नहीं था. उन्हें बिलकुल ही नहीं लगा कि नौबत यहां तक आ जाएगी. जवानी के नशे में वे उन सारी दिक्कतों को भूल जाना चाहते थे जो उन्हें किसी भी तरह से तनाव पहुंचा सकती थीं.

लेकिन एक समय तो ऐसा आता ही है जब सच से सामना करना ही पड़ता है. उन के ऊंचाइयों को छूते रिश्तों के बीच कुसुम को शादी के न्योते भी आने लगे थे. शुरू में परिवार को लगा कि अभी पढ़ाई के कारण कुसुम शादी से इनकार कर रही है लेकिन अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई खत्म होने के बावजूद उस का मना करना परिवार को अखरने लगा. कुसुम के मातापिता उस पर शादी का दबाव बनाने लगे. फिर रितेश भी तो कोई बेहतर नौकरी नहीं करता था. ऊपर से उन के परिवार के बीच पहले से चली आ रही रिश्तेदारी एक असहजता पैदा कर रही थी. कुसुम पर दबाव था तो वह रितेश से इस बारे में बात करती और रितेश दबाव में आ जाता. फिर एक दिन ऐसा आया कि कुसुम ने साफसाफ रितेश को चेता दिया कि अगर वह कोई फैसला नहीं ले सकता, तो साफसाफ कह दे. उस के पास खुद को मारने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा.

यह सुनते ही रितेश के पैरोंतले जमीन खिसक गई. उन्होंने घर में बिना बताए भाग कर शादी करने का फैसला कर लिया. आज रितेश और कुसुम को शादी किए 4 साल बीत चुके हैं और उन दोनों का एक बेटा भी है. परिवार वालों ने तो 2 साल बाद ही बेटे और लिए घर के दरवाजे खोल दिए थे. बिरादरी में इस रिश्ते के कारण हुई बदनामी भी पुरानी बात हो गई. लेकिन अब उन के रिश्ते में सबकुछ नौर्मल नहीं चल रहा है. आएदिन झगड़े होने लगते हैं. मामला कुछ यों है कि शादी के बाद कुसुम को शुरू से बाहर काम करना और घर की जिम्मेदारी में आधी हिस्सेदारी देना ठीक लगा. उस ने वहीं पास में एनजीओ में फील्ड वर्कर का काम करना शुरू कर दिया. पहले तो सब ठीक चल रहा था लेकिन बाद में बाहर और घर के काम में तालमेल बैठाना कुसुम के लिए मुश्किल हो गया.

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