बौडी हेयर रिमूवर विकल्प बने जरूरत नहीं
Mukta|October 2020
बौडी हेयर रिमूवर विकल्प बने जरूरत नहीं
लोग महिलाओं के सिर पर घने लंबे बालों को महिला का गहना समझते हैं. लेकिन लड़कियों के पैरों, हाथों, कांख के नीचे (अंडरआर्स), चेहरे, पीठ, वैजाइना के ऊपर बाल आना या दिखना खराब क्यों मानते हैं?
रोहित

वर्क फ्रोम होम को ले कर पिछले दिनों मेरी अपनी एक पुरानी फ्रैंड अमीषा (24 साल) से बात हुई. वह करोलबाग में स्थित प्रतिभा स्कूल में मेरी क्लासमेट रही थी. फिलहाल वह इन दिनों नोएडा में एक एमएनसी कंपनी से जुड़ी हुई है. कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर एमएनसी कंपनियां अपने स्टाफ को घर से ही काम करने को कह रही हैं, तो उसे भी घर से काम करने को कहा गया है. अभी एक साल पहले ही उस ने दिल्ली की अंबेडकर यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की थी. अमीषा अपने विचारों से खुले मिजाज की है तो उसे किसी विषय पर बात करते हुए खास झिझक महसूस नहीं होती. उस की यह क्वालिटी उसे अलग तो बनाती थी लेकिन स्कूलटाइम से ही उसे भलाबुरा सोचने वाले लोगों के केंद्र में भी रखती थी.

इसी कारण मेरे मन में विचार आया कि उस से इस बारे में पूछ्, 'अभी किस प्रकार की सहूलियत या दिक्कत वर्किंग वीमेन को उठानी पड़ रही है?' इस पर बात करते हुए उस ने खुल कर कहा, "मेरा कोई पति या बच्चा तो है नहीं, जो बातबात पर परेशान करे, इसलिए वह वर्क फ्रोम होम को ले कर बिंदास हूं. हां, कभीकभी टाइम ऊपरनीचे होता है तो रूटीन खराब हो जाता है, जिस से वह चिड़चिड़ापन महसूस होगा."

कुछ देर तक बात चलने के बाद उस ने हंसते हुए ही सही पर एक बात कह दी जो मेरे लिए बिलकुल अजीब या कहें नई थी.

'यार, वर्क फ्रोम होम में एक बात तो है कि आधे से ज्यादा वर्किंग वीमेन का बौडी हेयर साफ कराने का खर्चा जरूर बच रहा होगा." यह सुनते ही मैं ने कुछ समय के लिए पौज लिया, फिर हिचकिचाते हुए पूछा, कैसे?

"महिलाओं के शरीर में उगने वाले बाल लड़कों के लिए फोबिया होते हैं. जैसे, देखो मेरे कहते ही तुम कैसे शांत हो गए थे. यह सिर्फ लड़कों के लिए ही नहीं बल्कि लड़कियों में भी इसे बदसूरती का हिस्सा समझा जाता है. जबकि यह हकीकत है कि महिलाओं के शरीर पर कुछ जगह पर बाल आना स्वाभाविक हैं, वैसे ही जैसे पुरुषों के लिए.

"लोग महिलाओं के सिर पर घनेलंबे बालों को महिला का गहना समझते हैं. लेकिन लड़कियों के पैरों, हाथों, कांख के नीचे (अंडरआर्स), चेहरे, पीठ, वैजाइना के ऊपर बाल आना या दिखना खराब माना जाता है. यही लोग पुरुष के समय कहते हैं कि लौंडा जवान हो रहा है. क्या तुम ने कभी किसी लड़की को कांख के बालों के साथ नोटिस किया है? अगर देखा है तो तुम्हें कैसा महसूस हुआ?" उस के मुझ पर दागे ये सवाल तीर की तरह चुभने लगे थे.

अमीषा ने अपनी बात कालेज के किस्सों से बताई. उस का कहना था, "स्कूल के दिनों में उसे शरीर के खास हिस्सों में आए बाल इतने अजीब नहीं लगते थे. उस समय हाथोंपैरों के बाल रोएं की तरह हलके भी थे. लेकिन कालेज में शरीर के बालों से शर्मिंदगी होने लगी थी. खासकर तब जब वैस्टर्न ड्रैस पहनने का मन होता था. बिना कांख के बाल साफ किए तो कट स्लीव ड्रैसेज में आप हाथ उठा कर नाच भी नहीं सकते. यहां तक कि किसी को हाथों के इशारे से बुला भी नहीं सकते. सोशल नौर्म के हिसाब से महिला के लिए शरीर के बाल साफ करना कंपलसरी है. वरना शरीर को खुल कर हिलाडुला तक नहीं पाओगे. और यही चीज तो बहुत बार महिला के शरीर को सिकोड़ती है.

"आप बिना टांगों के बाल साफ किए स्कर्ट नहीं पहन सकते, न ही बाजुओं के बाल साफ किए बगैर स्लीव कट ड्रैस. घर में उस के बाजुओं में बाल आ रहे हैं या पैरों में. कम से कम कुछ दिन का खर्चा तो बच रहा है.'

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