"स्टूडियो सिस्टम से खत्म हुआ काला धन" -अतुल कस्बेकर
Mukta|September 2020
"स्टूडियो सिस्टम से खत्म हुआ काला धन" -अतुल कस्बेकर
इस समय फिल्म निर्माता अपनी आर्थिक हालत के चलते फिल्में ओटीटी प्लेटफौर्म पर रिलीज कर रहे हैं. वहीं, कई फिल्मों की शूटिंग रुकी हुई है. कोरोनाकाल में चल रही इन उठापटक पर फोटोग्राफर से निर्माता बने अतुल कस्बेकर से जानें उन की राय.
शांतिस्वरूप त्रिपाठी

जिस काम में दिलचस्पी हो और जिसे करने से खुशी मिलती हो, उसे करने में यकीन रखने के लिए मशहूर फैशन फोटोग्राफर के साथसाथ 'नीरजा' व 'तुम्हारी सुलू' जैसी फिल्मों के निर्माता अतुल कस्बेकर किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं. किंगफिशर कलैंडर सहित काफी फैशन इंडस्ट्री व अन्य में फोटोग्राफी करते आ रहे अतुल कस्बेकर की अपनी एक अलग पहचान है. वे अपनी प्रोडक्शन कंपनी के तहत रोचक व उत्कृष्ट कहानियों पर फिल्म बनाने पर जोर देते हैं और उस के पीछे उन की अपनी एक सोच होती है. प्रस्तुत है अतुल कस्बेकर से फोन पर हुई एक्सक्लूसिव बातचीत के खास अंश-

लौकडाउन में किस तरह समय बिताया?

हम वर्क फ्रोम होम के तहत फोटोग्राफी अथवा अपनी फिल्म की शूटिंग तो कर नहीं सकते थे. वरना हम तापसी पन्नू के साथ फिल्म 'लूप लपेटा' की शूटिंग अप्रैल में शुरू करने वाले थे. यदि सबकुछ ठीक रहता तो इस वक्त यह तय कर रहे होते कि फिल्म का पोस्टर क्या होगा? लेकिन हालात ऐसे बिगड़े कि कुछ भी नहीं कर पाए. इस बीच, हम ने अपनी आगामी सभी फिल्मों की पटकथा पर नए सिरे से काम किया और कोशिश की है कि उन्हें 'प्रोडक्शन फ्रैंडली' बनाया जाए. हम ने फिल्म की लंबाई के साथसाथ शूटिंग के लिए लोकेशन कम करने की भी कोशिश की है.

कोरोनाकाल में आप किस तरह की योजना बना रहे हैं, जिस से यह डर कम हो सके?

हम सुरक्षा के सभी उपाय करने वाले हैं. फिलहाल, मेरी जानकारी के अनुसार उन फिल्मों की शूटिंग हो रही है, जिन की शूटिंग सिर्फ 2 से 10 दिन की बाकी है. मसलन, आनंद एल राय की फिल्म 'हसीन दिलरुबा' की 2 हफ्ते की शूटिंग बाकी थी, तो वे थोड़ा सा रिस्क लेते हुए अक्तूबर या नवंबर माह में शूटिंग करने की सोच रहे हैं. पर हमारे जैसा निर्माता, जिस की फिल्म की शूटिंग अभी शुरू नहीं हुई, वह रिस्क लेने के बजाय कुछ समय इंतजार करना चाहेगा. इस के अलावा हम 2-3 इंश्योरेंस कंपनियों से भी बात कर रहे हैं. अगर शूटिंग शुरू होने के बाद कोविड19 के चलते 10 दिन शूटिंग रुक जाए तो काफी मुसीबत आ जाती है. इस के लिए भी हम इंश्योरेंस लेने का प्रयास कर रहे हैं.

अब तमाम फीचर फिल्में सिनेमाघर के बजाय सीधे ओटीटी प्लेटफौर्म पर प्रदर्शित हो रही हैं. इसे आप कितना सही मानते हैं?

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