बच्चे की इमोशनल कोच
Anokhi|July 25 2020
बच्चे की इमोशनल कोच
इन दिनों हम सबके मन में तरह- तरह की भावनाओं का ज्वार उठ रहा है। इनका सामना करना जब हमारे लिए मुश्किल भरा हो रहा है, तो तय है कि बच्चे के लिए यह चुनौती कई गुना ज्यादा है। कैसे बच्चों को सिखाएं इन भावनाओं का समाना करना, बता रही हैं शाश्वती
शाश्वती

हम सब इन दिनों कई तरह की भावनाओं से जूझ रहे हैं। चिंता, डर, परेशानी, प्यार, असहजता और भी न जाने कौन-कौन सी भावनाएं हर एक पल हम पर हावी हो रही हैं। जब हम वयस्कों का यह हाल है तो जरा सोचिए स्कूल, दोस्त, टीचर और खेलकूद के बीच जिनकी जिंदगी बीतती थी, हमारे उन बच्चों के मन परइन दिनों क्या बीत रही होगी। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार बच्चे किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना कैसे करते हैं, यह काफी हद तक अभिभावकों के भावनात्मक प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक बच्चों की भावनाओं को मैनेज करने के मामले में अभिभावकों को दो श्रेणी में बांटा जा सकता है- इमोशनल कोच और इमोशनल डिस्मिसर यानी बच्चों के नाजुक भावनाओं को एक सिरे से खारिज करने वाले।आप अपने बच्चे की भावनाओं को जितनी अच्छी तरह से मुश्किल दिनों में मैनेज करेंगी, आने वाले दिनों में उसका उतना ज्यादा सकारात्मक असर उसकी जिंदगी में देख पाएंगी।

भावनाओं से भागे नहीं, बात करें

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July 25 2020