मां बनें तब दिल हां कहे जब
Anokhi|April 11, 2020
मां बनें तब दिल हां कहे जब
शादी के तीन साल बाद भी बच्चा नहीं है। अरे, शादी की है तो बच्चा भी तो होना चाहिए। भारतीय परिवारों में शादी हुई नहीं कि बच्चे की चाहत सामने रख दी जाती है,यह सोचे-समझे बिना कि जोड़ा यह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है भी या नहीं। मां बनने के सामाजिक दबाव का सामना कैसे करें, बता रही हैं चयनिका निगम
चयनिका निगम

सुधा 30 साल की हैं और चेन्नई में रहती हैं, उनके पति विवेक नई दिल्ली में। नौकरियों के चलते दोनों अलग- अलग शहरों में रहते हैं। अपने-अपने करियर में दोनों ही बहुत खुश हैं। लेकिन उनका परिवार बिल्कुल खुश नहीं है। परिवार की चाहत जो पूरी नहीं हो रही है। परिवार चाहता है कि अब सुधा भी मां बनें, उनकी शादी को भी दो साल हो चुके हैं। लेकिन सुधा तब तक परिवार नहीं बढ़ाना चाहती हैं, जब तक वो और विवेक साथ न रहने लगे। मगर ये बात परिवार वाले नहीं समझते और समय-समय पर सुधा को बातें सुननी ही पड़ती हैं। इन सबका नतीजा है कि अब वो बेहद तनाव में रहती हैं। नौकरी की चिंताएं हैं, वो अलग। ऐसी स्थिति में सुधा अकेली नहीं हैं। अपने आस-पास ही नजर घुमाइए तो आपको दुख में डूबी ऐसी महिलाएं मिल जाएंगी, जो फिलहाल मां बनने के लिए तैयार नहीं हैं। परिवार और अपनों का दबाव उन्हें मां बनने के लिए तैयार तो नहीं कर पा रहा है, लेकिन तनाव और मानसिक दिक्कत जरूर दे रहा है। कोई ये नहीं समझ रहा कि जिसे मां बनना है, उसकी चाहत भी तो अहमियत रखती है। इस परेशानी का सामना करने वाली महिलाओं को भले ही समस्या का हल ना दिखता हो, लेकिन यकीन मानिए हल उनके सामने ही होता है। कैसे इस चुनौती का करें सामना, आइए जानें:

बहस का कोई फायदा नहीं

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

April 11, 2020