जिंदगी अब नहीं होगी समझौतों से भरी

Anokhi|March 7, 2020

जिंदगी अब नहीं होगी समझौतों से भरी
हम महिलाएं जब अपनी बात करती हैं, तो पता नहीं क्यों हमारा सुर नीचे हो जाता है। हमारी इच्छाएं, सपने प्राथमिकता सूची में नीचे दफन हो जाते हैं। इस बार अंतरराष्टीय महिला दिवस से अपनी इच्छाओं की सुध लेना भी शुरू कीजिए। कैसे? बता रही हैं
जयंती रंगनाथन

दक्षिण अफ्रीका की अश्वेत स्त्री विमर्श लेखिका और फेमिनिस्ट केटी टेस्ट्रों ने चंद दिनों पहले अपने ब्लॉग में लिखा था, 'मैं अपने शरीर को लेकर बिलकुल शर्मिंदा नहीं हूं।' उसकी वजह थी। बचपन से गदबदी केटी को अपने परिवार, स्कूल, कॉलेज हर कहीं अपने बेडौल शरीर की वजह से जिल्लतों का सामना करना पड़ा। इतना कि केटी अपने आपको मिटाने की राह पर चल पड़ी थी। कुछ दिनों तक सड़कों पर भटकने, ड्रग्सलेने और गलत लोगों के साथ संबंध बनाने के बाद अचानक उन्हें अहसास हुआ कि वे ऐसा क्यों कर रही हैं? उन्हें दूसरों को अपने मोटे होने की सफाई क्यों देनी पड़ रही है? क्यों यह बताना पड़ रहा है कि उन्हें लाल नहीं, सफेद रंग पसंद है। वे खाने में अपने दोस्तों की तरह सलाद नहीं, पिज्जा खाना चाहती हैं। वह अपनी बहनों की तरह इंजीनियर नहीं, लेखिका बनना चाहती हैं। वो अपने से ठिगने आदमी से प्यार करना चाहती हैं। वो बच्चे पैदा नहीं, गोद लेना चाहती हैं। इसके बाद सब सही होता चला गया। केटी जब अपने ही बनाए जंजाल से बाहर निकल कर आईं, तो उन्हें लगा जैसे आखिरकार सही राह मिल गई है।

हमारे सामने ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। इनमें हम-आप तो शामिल हैं ही।जरा पलट कर अपनी दादी-नानी और मां की तरफ भी देख लीजिए। क्या आपको पता है कि जिंदगी भर दूसरों की लाई साड़ी पहनने वाली आपकी दादी को दरअसल किस रंग की साड़ी पसंद है? आपकी मां को गजलें सुनना पसंद है, फिल्मी गाने नहीं। दरअसल आप भी अकसर भूल जाती हैं कि आपके अधिकार क्या है? जो मिल गया, उसे अधिकार मान लेती हैं, जो नहीं मिला, उसकी ख्वाहिश का भारी पत्थर दिल में बांध लेती हैं। सोचती नहीं कि जो आप चाहें, जैसा आप चाहें, जब आप चाहें, आपका हो सकता है। ये आपका अधिकार है।

अपनी पसंद-अपना नजरिया

articleRead

You can read upto 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log-in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

March 7, 2020