होमिओपैथी और फैटी लिवर
Yogya Aarogya|February 2020
होमिओपैथी और फैटी लिवर
वर्तमान में फैटी लिवर का प्रकोप बहुत पाया जाता है । २५ वर्ष की आयु के हर ५ व्यक्तियों में से एक व्यक्ति इस रोग से ग्रस्त पाया जाता है । यदि ध्यान न रखा गया तो यह तकलीफ लिवर सिरोसिस में बदल सकती है । फैटी लिवर का अर्थ है लिवर की कोशिकाओं में अधिक वसा का एकत्रित होना ।
डॉ. संदीप पाटिल

आधुनिक ज्ञान के अनुसार यह तकलीफ दो तरह की हो सकती है ।

१) शराब के सेवन से २) शराब पीने की लत न हो तो भी हो सकती है ।

पहले वर्ग में जो लोग कभी कभी शराब पीते हैं, रोज़ निश्चित मात्रा में पीते हैं, कभी कभी अधिक मात्रा में शराब पीनेवाले और रोज़ ही अधिक मात्रा में शराब पीनेवाले आते हैं । शराब पीने से लिवर की कोशिकाओं पर शराब अपना विषैला प्रभाव दिखाती है । ये कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं । इलाज के दौरान लिवर पर घाव हो जाते हैं । ऐसा बार बार होने पर घाव पर और भी वसा एकत्रित हो जाती और फाइब्रोसिस हो जाता है । फलस्वरूप यकृत शोथ या सिरोसिस हो जाता है ।

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