हृदय विकार में जीवनसत्व 'सी' से जीवन

Yogya Aarogya|March 2020

हृदय विकार में जीवनसत्व 'सी' से जीवन
हृदय पर ‘आघात' जानलेवा साबित हो सकता है। खून में कोलेस्ट्रोल का प्रभाव आवश्यकता से अधिक बढ़ने न पाए और खून में गाँठें न पड़ने पाएँ इन बातों के लिए आहार द्वारा पोषक-द्रव्यों का नियमित व योग्य प्रमाण में सेवन करना चाहिए। हृदय विकार के प्रतिबंध के लिए जीवनसत्व 'सी' बहुत अधिक फायदेमंद होता है।
डॉ. विजया साठे

शास्त्रज्ञों के मतानुसार सिर्फ हृदय ही नहीं अपितु पूरी रक्ताभिसरण संस्था के तंदुरूस्ती के लिए जीवनसत्व 'सी' अत्यंत आवश्यक है। जीवनसत्व 'सी' की कमी के कारण रक्तवाहिनियों का स्तर खुरदरा हो जाता है और उसमें कोलेस्ट्रोल की परत जमने लगती है।

रक्तप्रवाह में कोलेस्ट्रोल का स्तर सुनियंत्रित करने के लिए 'सी' महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

१) खून में कोलेस्ट्रोल का रूपांतरण लिवर द्वारा बाइल एसिड में (Bile Acid) होने के लिए 'सी' आवश्यक होता है। यह बाइल एसिड बाद में पचन मार्ग में जाकर बाहर फेंक दिए जाते हैं।

२) पचन मार्ग से कुछ प्रमाण में कोलेस्ट्रोल पुनः खून में अभिशोषित (Recycling) होनेवाली प्रक्रिया को 'विटामिन सी' की वजह से रोका जाता है।

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