जो है उससे संतुष्ट रहें - दूर के ढोल सुहावने नहीं होते

Yogya Aarogya|February 2020

जो है उससे संतुष्ट रहें - दूर के ढोल सुहावने नहीं होते
एक गाँव था । उस गाँव से दूर एक पहाड़ी पर कुछ अघोरी लोग मठ बनाकर रहा करते थे । वे अपनी प्रथाओं के अनुसार अनुष्ठान करते हुए ज़ोर ज़ोर से ढोल बजाते, जिसकी आवाज़ पहाड़ियों से टकराकर नीचे गाँव में आती । गाँव तक आते आते ढोल की आवाजें बड़ी मधुर बन जातीं ।
सरश्री

गाँव के मुखिया के बेटे को ऊपर पहाड़ी पर बज रहे ढोल की आवाजें बड़ी अच्छी लगतीं । उसके मन में तीव्र इच्छा उठती कि वह इन प्यारी आवाज़ों को नज़दीक से सुने । लेकिन पहाड़ी पर जाने का रास्ता आसान नहीं था ।

एक दिन उसके पिता ने सोचा बेटे को ढोल ढोलवालों को उसने अपनी हवेली पर ही सुनना है तो बुलाकर ढोल बजवा दिया । लेकिन उन ढोल की तेज़ आवाजें बेटे को कर्कश लग रही थीं । उसके कान फटने लगे और उसने उन ढोलवालों को वहाँ से भगा दिया । वह अपने पिता से ज़िद करने लगा कि उसे एक बार पहाड़ी पर जाकर उन आवाज़ों का पास से आनंद लेना है ।

थक-हारकर एक दिन मुखिया ने बेटे की ज़िद पूरी करने की ठानी । वह बड़े जतन से बेटे को लेकर जैसे तैसे पहाड़ी चढ़ा और अघोरियों के मठ में पहुँचा, जहाँ वे ज़ोर ज़ोर से ढोल बजा रहे थे । वहाँ पहुँचकर बेटे को बड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि वे आवाजें पास से उतनी ही बेसुरी लग रही थीं, जितनी उसकी हवेली पर बजे ढोल की आवाजें थीं । वहाँ भी उसका सिर दुखने लगा और वह पिता के साथ वापस गई. दर के ढोल लौट आया । बस तभी से कहावत बन सुहावने होते हैं ।

हमारी ज़िंदगी में भी ऐसा ही होता है । हमें ज़्यादातर दूर के ढोल सुहावने लगते हैं । आइए, इसे एक आम उदाहरण से समझते हैं । १० माले की एक बिल्डिंग थी । उसके ग्राउंड फ्लॉरवाले घर में एक गार्डन भी था, जिसका मालिक उसमें खूब सब्ज़ियाँ उगाता । दसवें माले के टेरेस फ्लैट पर रहनेवाला इंसान जब नीचे झाँकता तो उसे लगता, ‘ काश! यह ग्राउंड फ्लॉर का फ्लैट मेरा होता तो मैं भी ताज़ी सब्ज़ियाँ उगाता और उन्हें मज़े से खाता ।' दूसरी ओर ग्राउंड फ्लॉर पर रहनेवाला इंसान ऊपर देखकर सोचा करता, ' काश! वह टेरेस फ्लैट मेरा होता तो मैं सर्दियों में धूप सेकता, बरसात में बारिश में नहाता, सुबह शाम खुले आकाश में पंछियों को उडता देखता!' इस तरह दोनों को ही दूर के ढोल सुहावने लगते थे और जो उनके पास था, उसमें कमियाँ ही दिखती थीं ।

articleRead

You can read upto 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log-in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

February 2020