कोलेस्ट्रोल से हृदय रोग का खतरा

Yogya Aarogya|March 2020

कोलेस्ट्रोल से हृदय रोग का खतरा
आज-कल बदलती जीवनशैली, भागदौड़, फास्ट फूड, तैलीय पदार्थों का आहार में बढ़ते प्रमाणों की वजह से खून में कोलेस्ट्रोल बढ़ जाता है और इसका परिणाम सीधा हृदय पर होता है।
डॉ. रॉबिन आनंद

कोलेस्ट्रोल एक प्रकार की वसा है। नरम मक्खन की तरह होनेवाला यह कोलेस्ट्रोल शरीर की सभी पेशियों और खून में स्थित होता है। कई प्रकार के खाद्यपदार्थों में कोलेस्ट्रोल पाया जाता है, जैसे- जानवरों के मांस और डेयरी उत्पादन। यह शरीर में प्रमुखतः लिवर में तैयार होता है। खून में इसका सामान्य प्रमाण १५०-२०० मि. ग्रा. होता है। जब खून में इसका प्रमाण बढ़ जाता है तब उसे 'हाइपर कोलेस्ट्रॉलएमिया' कहते हैं।

कोलेस्ट्रोल का उपयोग शरीर में हार्मोन्स तथा पेशियों का आवरण तैयार करने के लिए और जीवनसत्व डी एवं बाइल सॉल्ट्स तैयार करने के लिए होता है।

कोलेस्ट्रोल का प्रमाण बढ़ने के लक्षण

कोलेस्ट्रोल का प्रमाण बढ़ने के कारण हृदय रोग, रक्तचाप, पित्ताशय की पथरी इत्यादि गंभीर व्याधियाँ निर्माण होती हैं। कोलेस्ट्रोल का प्रमाण बढ़ने की वजह से हृदय की रक्तवाहिनियाँ ठोस हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप हार्ट अटैक की संभावना रहती है।

आपके शरीर को कुछ कोलेस्ट्रोल की आवश्यकता होती है, लेकिन बहुत अधिक कोलेस्ट्रोल आपकी धमनियों को अवरुद्ध कर सकता है। इसीलिए उच्च कोलेस्ट्रोलवाले वयस्कों में दिल के दौरे और स्ट्रोक की संभावना अधिक होती है। क्योंकि उच्च कोलेस्ट्रोल वयस्कों में हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाता है, इसलिए डॉक्टर वयस्कों को कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिए पौष्टिक आहार लेने और अधिक व्यायाम करने की सलाह देते हैं।

कोलेस्ट्रोल कितने प्रकार के होते हैं?

आपका रक्त कई अलग-अलग पैकेजों में कोलेस्ट्रोल को ले जाता है। इन कोलेस्ट्रोल पैकेजों को टोटल (कुल) कोलेस्ट्रोल, एचडीएल और एलडीएल कहा जाता है।

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