अनिद्रा - यौगिक तथा घरेलू इलाज
अनिद्रा - यौगिक तथा घरेलू इलाज
अनिद्रा के रोगी को नींद न आने की ही सबसे बड़ी चिन्ता रहती है। यह नींद न आने की प्रबल चिन्ता ही नींद में बाधक हो जाती है। मनुष्य की चेतना जब तक अपना साधारण काम करती है तब तक जाग्रतावस्था रहती है। जब चेतना की सामान्य क्रियाएँ बन्द हो जाती है तब सुषुप्तावस्था उत्पन्न हो जाती है। इसे ही निद्रा कहते है। निद्रा में मस्तिष्क के स्नायु अपना काम करना बन्द कर देते है। शरीर के दूसरे भाग अपना कार्य करते रहते हैं, किन्तु इस क्रिया का नियन्त्रण मस्तिष्क के द्वारा नहीं होता है। इसका नियंत्रण स्वतंत्र नाड़ी मण्डल के द्वारा होता है।
डॉ. दीनानाथ रॉय

भारतीय दर्शन में पुरूष की जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्त, और तुरीय - यह चार प्रकार की अवस्थाएँ मानी गई है । निद्रा इस अवस्था में व्यक्ति दूसरा नाम है । सुषुप्तावस्था का चेतनाहीन हो जाता है । उसे बाह्य संसार का कुछ भी ज्ञान नहीं रहता और न उसके सामने कोई काल्पनिक संसार ही रहता है । बाह्य संसार के ज्ञान की अवस्था जाग्रतावस्था है है । अवस्था स्वप्नावस्था ज्ञान की काल्पनिक संसार के और है । मानसिक भिन्न एक दूसरी से बिल्कुल अवस्थाएँ ये स्वास्थ्य के लिए निद्रा की बड़ी आवश्यकता है ।

निदावस्था से लाभ

1. जाग्रतावस्था में अनेक प्रकार के कार्य करने में जो शक्ति मनुष्य खो देता है, उसकी पूर्ति निद्रावस्था में होती है। शरीर के जो स्नायु जाग्रतावस्था में टूट जाते हैं अथवा क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। उनका सुधार निद्रावस्था के समय होता है।

2. जाग्रतावस्था में मनुष्य का मस्तिष्क काम करता रहता है अतएव उसके शरीर के द्वारा उत्पादित शक्ति अधिकतर उसके कार्यों में खर्च होती है।

3. जाग्रतावस्था में शक्ति का प्रवाह मस्तिष्क की ओर होता है, इसी कारण शरीर के दूसरे अंगों को पर्याप्त शक्ति नहीं मिलती। इसलिए निद्रावस्था में शारीरिक थकान दूर होकर शरीर और मन स्वस्थ रहता है।

4, जितनी शक्ति मनुष्य के विचार में खर्च होती है, उतनी शरीर की और किसी प्रतिक्रिया में नहीं खर्च होती है। निद्रावस्था में मनुष्य विचारशून्य हो जाता है और उसके मस्तिष्क की प्रबल क्रियाएं रुक सी जाती है। ऐसी अवस्था में शक्ति का संचार शरीर के दूसरे के अंगों की ओर होने लगता है और यदि ये अंग शक्ति की कमी के कारण निर्बल हो रहे हों तो स्वस्थ और सबल हो जाता है।

5. पाचन क्रिया के भली-भाँति होने के लिए विचारों का चलना बन्द होना अत्यंत आवश्यक है। निद्रावस्था में विचार प्राकृतिक रूप से बन्द हो जाते है।

6. निद्रा मनुष्य के सही स्वास्थ्य का सूचक हैं प्रतिदिन निर्विघ्न निद्रा होना स्वास्थ्यप्रद होता है।

7. मानसिक स्वास्थ्य के लिए निद्रा बहुत आवश्यक है, यदि किसी को लगातार जागना पड़े तो वह चिड़चिड़ा, तनाव से ग्रसित और उसके कार्य की क्षमता में कमी हो सकती है।

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January-march2020