अत्यंत जटिल रोग - मस्कुलर डिसट्रॉफी

Swasthya Vatika|January-march2020

अत्यंत जटिल रोग - मस्कुलर डिसट्रॉफी
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने आज इतनी प्रगति की है, नए नए आविष्कार हुए हैं, नित नवीन औषधियों की खोज हो रही है फिर भी कुछ रोग ऐसे हैं, जिनका कोई इलाज आधुनिक चिकित्सा शास्त्रियों के पास नहीं है । मस्कुलर डिस्ट्रॉफी ( Muscular Dystrophy ) मांसपेशियों का एक ऐसा ही विकार है, जो रोगी को धीरे धीरे मृत्यु के करीब ले जाता है । इसे मांसपेशी का अपविकास या आयुर्वेदानुसार मांसक्षय कहते हैं ।

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रोग वंशानुगत दोष (जिनेटिक विकार) के कारण होता है। इस रोग में जीन्स की विकृति के कारण स्वस्थ मांसपेशी में बनने वाला प्रोटीन नहीं बनता है। इसके कारण अनेक प्रकार के कंकालीय मांसपेशी समूह (Proximal Groups Of Muscles) का संकुचन (Atrophy) या पेशी शोथ हो जाता है। यह प्रायः बचपन में होता है तथा सर्वप्रथम मांसपेशी की तंतु सूज जाती है। इसके बाद अर्धपारदर्शक वस्तुएं जमा होने लगती हैं तथा जोड़ने वाली तंतु का विकास अधिक मात्रा में होकर वसायुक्त ऊतकों के बीच में जमा होने लगता है क्योंकि उनकी कार्बोहाइड्रेट से ग्लाइकोजन बनाने की क्षमता समाप्त हो जाती है जिससे कार्बोहाइड्रेट बसायुक्त ऊतक में बदलकर जमा होने लगता है और वसायुक्त ऊतक जमा होने से मांसपेशी अधिक सूजी या फूली हुई दिखाई पड़ने लगती है। इस प्रकार मांसपेशियों के क्षय होने की प्रक्रिया प्रारंभ होने लगती है। इसमें मांसपेशियों में अचानक कमजोरी या निर्बलता आती है। सबसे पहले मांसपेशियां अकड़ने लगती हैं, बाद में धीरे-धीरे स्थिर होकर पत्थर की तरह कड़क हो जाती हैं। इस अकड़न के कारण रोगी खड़ा होने, चलने-फिरने व अंत में बैठने में भी असमर्थ हो जाता है क्योंकि मांसपेशियों की सक्रियता समाप्त हो जाती है।

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