फिर लौटा आयुर्वेद का जमाना
Sadhana Path|October 2020
फिर लौटा आयुर्वेद का जमाना
एक युग था जब लोग रोगों की चपेट में नहीं आते थे और अगर आ भी जाते थे तो स्वस्थ होने के लिए आसपास में ही मौजूद वैद्य के पास चले जाते थे या फिर घर में ही इतने घरेलू उपचार होते थे कि रोग घरेलू नुसवों व आस-पास पाई जाने वाली वनस्पति के माध्यम से ठीक हो जाता था। घरेलू नुसवों से समृद्ध चिकित्सा पद्धति का नाम है आयुर्वेद। इसके विषय में कई रोचक जानकारी पढ़ें इस लेख से।
शशिकांत 'सदैव'

समय के चलते, आज प्रकृति भी दूषित हो गई है जिसके कारण हर चीज मिलावटी एवं अशुद्ध मिलती है। इसी अशुद्धता के कारण मानव जीवन में रोगों का भी प्रकोप बढ़ा है लेकिन समय की कमी के कारण लोग इन रोगों से मिनटों में ठीक हो जाना चाहते हैं जिसके लिए कई केमिकल वाली अप्राकृतिक दवाइयों का प्रयोग होने लगा है।

ये दवाइयां रोगी को ठीक तो कर देती हैं परंतु कई बार कुछ हद तक यह रोग को जड़ से खत्म करने में अक्षम रहती है या फिर इनसे जनित दुष्प्रभाव शरीर में कई अन्य रोग या व्याधियां उत्पन्न कर देते हैं।

एलोपैथिक दवाओं का मूल- आयुर्वेद

दवाइयां देसी हों या विदेशी, प्राकृतिक हों या अप्राकृतिक, सत्य तो यह है कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आयुर्वेद से ही जुड़ी होती हैं। भले ही उनके 'रैपर' (आवरण, खोल) ) बदल गए हों परंतु भीतरी संघटक (सामग्री) कहीं न कहीं आयुर्वेद से ही जुड़ी होती है। हर रोग के इलाज के लिए हम दवाइयों पर ही आश्रित हैं। परंतु आज जमाना धीरे-धीरे बदल रहा है, वापस अपनी जड़ों की ओर रुख कर रहा है अर्थात् हम आज फिर आयुर्वेद की ओर उन्मुख हो रहे हैं, पुनः प्राकृतिक चिकित्सा एवं उपचार को अपना रहे हैं। आयुर्वेद में मात्र औषधियां ही नहीं बल्कि निरोगी एवं स्वस्थ रहने के विभिन्न उपचार, उपाय एवं चिकित्साएं भी हैं जिनके माध्यम से न केवल जटिल एवं असाध्य रोगों को ठीक किया जा सकता है बल्कि उनके होने से भी बचा जा सकता है।

इस आधुनिक युग में हम जिन ऐलोपैथिक औषधियों का सेवन करते हैं उनका भी मूल आयुर्वेद ही है। कोई भी रोग हो या कोई भी स्वास्थ्य संबंधी शोध सभी का आधार आयुर्वेद ही रहा है। बिना आयुर्वेद के कोई भी चिकित्सा, कोई भी औषधि, कोई भी शोध अधूरा है। आज हम जिन विदेशी दवाइयों का प्रयोग करते हैं वह और कुछ नहीं आयुर्वेद का ही दूसरा रूप है। ये दवाइयां हमारे रोगों को ठीक करने में हमारी मदद करती हैं परंतु हमें निरोगी नहीं बनाती अर्थात् आयुर्वेद में ऐसे कई आयाम एवं नुस्खे हैं जिन्हें साधारण जन अपनाएं तो बिना किसी रोग के लंबी उम्र जी सकता है। ये विदेशी दवाएं न केवल कीमती होती हैं बल्कि इनका दुष्प्रभाव भी अधिक होता है और यदि इन दवाइयों का अधिक सेवन किया जाए तो शरीर में कई अन्य रोग पनपने की आशंका बनी रहती है। परंतु आयुर्वेद में जिस माध्यम से मानव जीवन के स्वास्थ्य संबंधी उपचार एवं उपाय बताए गए हैं वह न केवल जातक को स्वस्थ एवं चिर-आयु रखते हैं बल्कि प्रकृति से जुड़े होने के कारण इनके कोई साइड इफेक्ट यानी दुष्प्रभाव भी नहीं होते हैं।

विदेशी भी अपना रहे हैं आयुर्वेद

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