आयुर्वेद से करें पर्यावरण की रक्षा
Sadhana Path|July 2020
आयुर्वेद से करें पर्यावरण की रक्षा
यदि हमें प्रकृति को बचाना है तो पर्यावरण संरक्षण पर जोर देना होगा। औषधीय पेड़-पौधे लगाने होंगे। जिससे पर्यावरण दूषित होने से तो बचेगा ही, साथ ही आयुर्वेद का प्रसार भी होगा।
डॉ. हनुमान प्रसाद उत्तम

पर्यावरण और मानव का अत्यंत निकट का संबंध है एवं आयुर्वेद निवारणार्थ समर्पित है। विभिन्न वनौषधियों का प्रयोग रोग प्रतिषेध, स्वास्थ्य रक्षा एवं रोग निवारण के लिए होता आया है। इसे सिद्ध करने की जरूरत नहीं है। आयुर्वेद शुरू से ही मनुष्य को प्रकृति के अनुकूल आचरण करने की प्रेरणा देता आया है, पर्यावरण और जीवन का संबंध इतना घनिष्ट और अपरिहार्य है कि उसके बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह पाया गया है कि जो मनुष्य प्रकृति के जितना अधिक अनुकूल है। स्वास्थ्य की दृष्टि से वह व्यक्ति उतना ही अधिक निगपद एवं व्याधियों के आक्रमण से दूर है। मनुष्य का आहार-विहार हो या रहन-सहन हो, वह सर्वथा प्रकृति सापेक्ष होता है।

हमें यह भी देखने में आता है कि न केवल मनुष्य अपितु प्रापी की चारों तरफ प्रकृति का सघन आवरण है जो सदैव अपने धेरै में है और हमारे प्रत्येक प्राणी के जीवन को धेरै रहता है। प्रकृति का यह आवरप या घेरा ही पर्यावरण है जो हमारे जीवन के लिए न केवल अमुल्य वरदान है अपितु हमारे जीवन का आधार है। पर्यावरण का उपयोग केवल मनुष्य जाति के लिए ही नहीं है, अपितु जगत के समस्त प्रापियों एवं सजीव द्रव्यों के लिए है।

आयुर्वेद से पर्यावरण संतुलन

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