यज्ञ का पर्यावरण पर प्रभाव
Sadhana Path|July 2020
यज्ञ का पर्यावरण पर प्रभाव
हाल के समय में पर्यावरण को बचाने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं, वहीं ऐसा कहा जाता है कि यज्ञ भी पर्यावरण शुद्धि का काम करते हैं। इस विषय पर विज्ञान क्या कहता है, आइए जानते हैं लेख से।

हमारे धर्मप्रधान देश में जब भी किसी यज्ञ का आयोजन होता है तब यही कहा जाता है कि इससे पर्यावरण सुद्ध होगा, परंतु वर्तमान संदभौ में इस तथ्य की वैज्ञानिक धरातल पर विवेचना आवश्यक है। मानव पर्यावरण खासतौर से वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे और जंतुओं से मिलकर बना है। किसी भी या का आयोजन वायु के क्षेत्र यानी वायुमंडल को प्रभावित कर सकता है लेकिन अन्य भागों पर इसके असर अभी वैज्ञानिक स्तर पर स्पष्ट नहीं है।

विज्ञान की अस्वीकार्यता

वायुमंडल में जो गंदगी विभिन्न प्रकार के प्रदूषकों से फैलती है, अमें विषैली गैसें (सल्फर डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो और डाई ऑक्साइड्स, हाइड्रो कार्बन्स), कपीय पदार्थ (विभिन्न धातुओं के कण) और विभिन्न रोगों के कीयणु खास हैं। इस बारे में वायुमंडन स्वच्छता या शुद्धता का आशय यह हुआ कि विषैली गैसों, कणीय पदार्थों और कीटाणुओं का घातक स्तर से कम या समाप्त होना। यज्ञ में जलाई जाने वाली विभिन्न सामग्री (तरह-तरह की लकड़ियाँ, सुगंधित पदार्थ और घी आदि) से वायुमंडल में कोई भी ऐसे पदार्थ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नहीं बनते जो इन प्रदूषकों से क्रिया करके या फिर इन्हें सोखकर वायुमंडल को शुद्ध कर सकें। अतः यज्ञ द्वारा वायुमंडल स्वच्छता/शुद्धता को वैज्ञानिक स्तर पर एकदम स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

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