दूसरों के लिए जीने में भी आनंद है

Sadhana Path|February 2020

दूसरों के लिए जीने में भी आनंद है
जब कोई व्यक्ति दूसरों का ध्यान रख कर पहले उनके बारे में सोचता है, तो उसके भीतर एक अद्भुत भावना उत्पन्न होती है। जैसे ही आप किसी और के बारे में सोचते हैं, तो न केवल वह व्यक्ति आपके प्रति सोचता है बल्कि ईश्वर भी आपके लिए सोचते हैं।
परमहंस योगानंद

ऐसे भी लोग हैं जो कहते तो हैं कि 'मैं धर्मात्मा आदमी हूं' पर मंदिर या चर्च में कोई उनके स्थान पर बैठ जाए तो वे "उसका सिर फोड़ने को तैयार जाएंगे! कभी-कभी ऐसा दृश्य मेरी सभाओं में भी देखने को मिलता है। यह आपकी जगह पर बैठना चाहता है, तो उसे बैठने दें, भले ही आपको खड़ा रहना पड़े। आपके इस आदर्श व्यवहार के कारण प्रतिदिन आपको कोई-न-कोई ऐसा व्यक्ति मिलेगा जो आपके लिए विचारपूर्वक सोचेगा। जब आप दूसरों के लिए जीना सीख लेते हैं, तो दूसरे आपके लिए जिएंगे। व्यवहार कुशल, दूसरों के लिए सोचने वाले व्यक्ति का संग हर कोई चाहता है।

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