शाहिद का दांव

Satyakatha|February 2020

शाहिद का दांव
शाहिद के दिमाग में पड़ोसन रेवा के प्रति नफरत की आग भर चुकी थी. वह आग शोला तब बनी जब शाहिद की 18 वर्षीय बेटी फातिमा घर से अचानक गायब हो गई. शाहिद को जब बेटी के गायब होने की सच्चाई पता चली तो...
अलंकृत कश्यप

लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई एक डूडा कालोनी है कांशीराम कालोनी, जो पारा थाने के अंतर्गत आती है. रमेश गौतम का परिवार इसी कालोनी में रहता था. उस की पत्नी रेखा ( 45 वर्ष) आलमबाग स्थित एक निजी क्लिनिक में वार्ड आया की नौकरी करती थी, जबकि उस का पति रमेश आटो मैकेनिक था. रेखा रोजाना सुबह के समय अपनी ड्यूटी के लिए निकलती थी और ड्यूटी पूरी कर के नियत समय पर घर लौट आती थी.

16 अक्तूबर, 2019 की शाम को रमेश घर लौटा तो पत्नी रेखा को घर न पा कर उस ने बेटी रीतू गौतम से पूछा, “अभी तक तुम्हारी मम्मी घर नहीं आई है?"

"नहीं पापा, मम्मी अभी नहीं आई है. पता नहीं आज कैसे इतनी देर हो गई ?" रीतू ने बताया.

"हो सकता है आज क्लिनिक में कोई जरूरी काम आ गया हो." रमेश ने सोचा और पत्नी का इंतजार करने लगा.

काफी रात तक इंतजार करने के बाद भी रेखा नहीं आई तो रमेश पत्नी को देखने उस के क्लिनिक पहुंच गया. वहां उसे पता चला कि रेखा अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद शाम को घर चली गई थी. क्लिनिक के कर्मियों से पूछने पर रमेश को पता चला कि रेखा कृष्णानगर में टीपू नामक व्यक्ति से पैसे लेने की बात कह रही थी.

जब देर रात तक रेखा घर वापस नहीं लौटी तो रमेश गौतम ने अगले दिन दोपहर तक उसे परिचितों के यहां तलाशा. इस के बाद भी जब उस का कोई सुराग न लगा तो उस ने थाना पारा पहुंच कर पत्नी की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

अगले दिन 17 अक्तूबर, 2019 को थाना पारा के एसएसआई संतोष कुमार को एक दुखद सूचना मिली. पता चला कि वहां से 25 किलोमीटर दूर थाना सरोजनी नगर के अंतर्गत आने वाले कालिया खेड़ा गांव के पास वन विभाग के जंगल में एक महिला का शव मिला है. पता चला कि वह शव पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी में रखा हुआ है. चूंकि थाना पारा में रमेश गौतम ने पत्नी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी, इसलिए एस एस आई संतोष कुमार ने अज्ञात लाश मिलने की सूचना रमेश गौतम को दे दी. रमेश गौतम मोर्चरी पहुंच गया.

जब उसे सरोजनी नगर थाना पुलिस द्वारा बरामद की गई महिला की लाश दिखाई गई तो उस ने उस की शिनाख्त अपनी पत्नी रेखा के रूप में कर दी. फिर पोस्टमार्टम के बाद रेखा का शव रमेश को सौंप दिया गया.

लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी प्रमेंद्र सिंह ने रमेश गौतम की बेटी रीतू गौतम की तहरीर पर भादंवि की धारा 302, 201 के अंतर्गत टीपू निवासी कष्णानगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

टीपू को गिरफ्तार करने के लिए थानाप्रभारी प्रमेंद्र सिंह ने अतिरिक्त थानाप्रभारी अरविंद कुमार पांडेय, एसआई संजय कुमार सिंह, दिनेश बहादुर आदि के साथ उस के घर दबिश दी. वह घर पर ही मिल गया. पुलिस उसे थाने ले आई.

थाने में टीप से पूछताछ की गई तो उस ने रेखा की हत्या में अपना हाथ होने से साफ इनकार कर दिया. लेकिन उस ने पुलिस को कुछ ऐसे सुराग दे दिए, जिस से पुलिस रेखा के सही कातिल तक पहुंच गई.

टीपू द्वारा पुलिस को ज्ञात हुआ कि रेखा का पड़ोस में रहने वाले शाहिद अली से आपसी मनमुटाव लगभग 10 महीने पहले हो गया था. शाहिद अली रेखा से रंजिश रखता था.

मांगने पर रमेश गौतम ने पुलिस को रेखा गौतम और शाहिद अली के मोबाइल नंबर उपलब्ध करा दिए. पुलिस ने दोनों फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर उन का अध्ययन किया तो पता चला कि शाहिद अली ने 16 अक्तूबर, 2019 को रेखा को फोन किया था.

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