हक की लड़ाई

Satyakatha|March 2020

हक की लड़ाई
हर एक मां को अपना बच्चा अपनी जान से प्यारा होता है. लेकिन ऊषा सबनीस धनाढ्य परिवार की एक ऐसी बेदर्द मां थी, जिस ने फिल्मी दुनिया में जाने के लिए 2 साल के बेटे श्रीकांत को ट्रेन में छोड़ दिया. 38 साल बाद अब श्रीकांत ने अपनी मां के खिलाफ कोर्ट में ऐसा केस डाला कि...
शैलेंद्र कुमार 'शैल'

कहते हैं कि कुछ रिश्ते खून के होते हैं बाकी सब संयोग से बनते हैं, लेकिन खास बात यह भी है कि रिश्तों की यह दुनिया जितनी सुकून देती है, उतनी ही उलझनें भी पैदा करती है. क्योंकि कभी रिश्ते फूलों की तरह महकते हैं तो कभी कांटे बन कर जिंदगी के सुख और चैन ही छीन लेते है.

लेकिन संयोग से बने रिश्तों से अलग कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जो बनते नहीं, बल्कि किन्हीं वजहों से बनाए जाते हैं. कुछ रिश्ते जताए जाते हैं तो कुछ सिर्फ दिखाए जाते हैं. ऐसा ही एक रिश्ता है एक मां और एक बेटे के बीच का, जिस का राज जब खुला तो मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच गया.

आरती महास्कर वह नाम है, जो पिछले कई दिनों से मुंबई में ही नहीं बल्कि देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. आरती पर आरोप है कि उन्होंने 38 साल पहले अपने ही बेटे श्रीकांत सबनीस को 2 साल की उम्र में चलती ट्रेन में जानबूझ कर छोड़ दिया और अभिनेत्री बनने के सपने लिए मायानगरी मुंबई आ गईं.

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