नए रूप में कबूतरबाजी

Saras Salil - Hindi|May Second 2020

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नए रूप में कबूतरबाजी
हमारे देश में कोरोना के चलते लौकडाउन में काफीकुछ बदल गया है. चलनाफिरना, आनाजाना, खरीदफरोख्त, लाना व ले जाना और भी बहुतकुछ. सफर करना तो लौक है ही.

सब से ज्यादा दिक्कत में प्रवासी मजदूर यानी अपने घर से दूर किसी शहर या राज्य में रोजीरोटी कमाने वाले हैं. वे अपने घर जाना चाहते हैं, लेकिन नहीं जा पा रहे, लौकडाउन जो लागू है. हां, 'कबूतरबाजी' के जरीए कुछ मजदूर अपने गांव जरूर पहुंच गए है.

कबूतरबाजी है क्या

लौकडाउन और कयूं की दोहरी मार झेल रहे पंजाब के मजदूरों को कबूतरबाजी के जरीए उन के मूल राज्यों छोड़ कर आने का गैरकानूनी धंधा जोरों पर है.

दरअसल, कबूतरबाजी मानव तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कूट शब्द है. गैरकानूनी तरीके से विदेश ले जाए जाने वाले पंजाबी नौजवानों के सिलसिले में इस शब्द का प्रचलन हुआ था. गैरकानूनी तौर पर विदेश जाने वालों को 'कबूतर' कहा जाता था और उन्हें भेजने वाले एजेंटों को 'कबूतरबाज' और इस सारे गोरखधंधे को 'कबूतरबाजी'.

पंजाब में बिहार व उत्तर प्रदेश के फंसे बदहाल मजदूर, जो अपने घरगांव जाना चाहते हैं, कोरोना काल के नए कबूतर हैं और बेईमान, लालची ट्रांसपोर्टर व कुछ जालसाज लोग कबूतरबाज हैं. राज्य पुलिस द्वारा हाल में की गई गिरफ्तारियों से इस गोरखधंधे का परदाफाश हुआ है.

कई कबूतरबाज काबू

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May Second 2020