बैंडबाजा और बरात अब कल की बात

Saras Salil - Hindi|May Second 2020

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बैंडबाजा और बरात अब कल की बात
कोरोना वायरस के कहर ने जहां शादियों की रफ्तार थाम दी है, वहीं इस का सब से ज्यादा खमियाजा कौन भुगत रहा है, जान कर हैरान रह जाएंगे आप...
कुमार अभय

उत्तर प्रदेश के चंदौली के रहने वाले सरोज कुमार खासा कुमार खासा चिंतित हैं. आगामी 11 जून को उन की बेटी की शादी है. उन्होंने 500 कार्ड छपने के लिए दिए थे, पर अब नहीं छपवाएंगे. लड़के वाले ने शादी को आगे बढ़ाने के लिए बोल दिया है, तो उन की चिंता बढ़ गई है.

लड़के के पिता ने भी घोड़ी वाले को कुछ रुपए पेशगी दिए थे, पर अब जब शादी नहीं हो रही है, तो अब यह पैसा भी वह लौटने से रहा. घोड़ी वाले ने साफ कह दिया कि जब शादी होगी, तब यह रुपए एडजस्ट कर दूंगा, पर पैसे किसी भी हालत में लौटा नहीं पाऊंगा, क्योंकि वे खर्च हो गए हैं और ऊपर से कर्जा चढ़ गया है.

धंधा अभी मंदा है

जब से कोरोना वायरस का खौफ हुआ है और सरकार ने लौकडाउन लगाया है, तब से शादीब्याह का धंधा भी पूरी तरह मंदा है. इस की मार सब से ज्यादा रोज कमानेखाने वालों पर पड़ी है.

दिल्ली के बुराड़ी के रहने वाले न्यू अशोक बैंड की हालत पतली है. शादीब्याह नहीं होने से कारोबार ठप है और घोड़ी तक को खिलाने के पैसे नहीं हैं.

अशोक ने फोन पर बताया, "साहब, बड़ी आफत में जान है. शादीब्याह में लोग बग्गी जरूर बुक कराते थे. इस से घर का खर्च निकल जाता था, साथ ही घोड़ी का चारा भी. अब तो घर चलाना मुश्किल है, तो घोड़ी को कहां से खिलाएं..."

पैसा नहीं तो चारा कहां

मनोज घोड़ी वाले की हालत तो इतनी खराब हो गई है कि वे फोन पर बोलतेबोलते रो पड़े. मनोज ने बताया, "शादी के सीजन में ही कमाई होती थी, जिस से पूरे साल घर का खर्चा चलता था. कोरोना वायरस क्या हम तो ऐसे ही मर जाएंगे.

मनोज को अपने साथ घोड़ों की भी चिंता है. वे बताते हैं, "मेरे पास 4 घोड़े हैं. इन पर हर महीने 15-17 हजार रुपए का खर्चा आता है. चारा, भूसी, चोकर देना होता है. हफ्ते में 3-4 बार गुड़ और चने भी देने होते हैं. सरसों के तेल से मालिश करनी होती है."

मनोज ने दुखी होते हुए आगे बताया,फोटो भेज रहा हूं घोड़ों की. आप जरूर देखना. वे खानपान की वजह से कमजोर हो गए हैं. अब आप ही बताओ कि जब घर का खर्च चलाने के लिए पैसे नहीं हैं,तो इन को कहां से खिलाएं...'

बैंडबाजे में लग चुका है जंग

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