औरतें, शराब और कोरोना

Saras Salil - Hindi|May Second 2020

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औरतें, शराब और कोरोना
आजकल एक चुटकुला बहुत वायरल हो रहा है और वह यह कि लोग तो लौकडाउन का पालन कर पा रहे हैं, लेकिन सरकार नहीं कर सकी. तभी तो सरकार ने लौकडाउन के बावजूद 40 दिनों से बंद शराब की दुकानों को खोलने का फैसला किया, ताकि देश की माली हालत संभाली जा सके.
प्राची भारद्वाज

जिन्हें अब तक नकारा शराबी समझा जाता था, अब वही देश की अर्थव्यवस्था को संभालेंगे. चुटकुलों में तो शराबियों को बाहुबली के रूप में भी दिखाया जा रहा है, जो गिरती हुई इकोनौमी को संभालने के लिए आगे आए हैं.

लेकिन बाहुबली क्या मर्द ही हैं ? उन औरतों का क्या, जो शराब पीती हैं? क्या उन को भी हमारा समाज इसी तरह स्वीकार कर सकता है? आदमी पीए और पी कर चाहे दंगा करे या मारपीट, उसे इस बात की छूट मिल जाती है कि उस ने पी रखी है, लेकिन जब एक औरत पीती है, तो समाज को उसे स्वीकारने में काफी दिक्कत होती है.

समाज को यह दिक्कत कम है कि करोड़ों औरतों के पति, पिता, बेटे क्यों शराब पीते हैं, क्योंकि ऐसा होता तो सरकार दुकानें ही नहीं चलने देती, जैसे ड्रग्स यानी नशीली दवाओं की दुकानें नहीं चल सकती हैं.

होना तो यह चाहिए कि शराब बिके ही नहीं, लेकिन टैक्स की खातिर न केवल शराब जम कर बिकवाई जाती है, बल्कि जगहजगह दुकानें मंदिरों की तरह खुलवाई जाती हैं.

समस्या तो लड़कियों से है कि वे पीती हैं. मतलब, बिगड़ी हुई हैं. शराब या सिगरेट पीना औरत के चरित्र से जोड़ दिया जाता है. जो औरतें इन्हें पीती हैं, उन्हें गलत नजर से देखा जाता है. शायद इसीलिए आजकल की जवान लड़कियां, जो ज्यादातर शराब और सिगरेट दोनों के शौक रखती हैं और पीने से कोई गुरेज नहीं करतीं, अपनेअपने बौयफ्रैंड की आड़ में पी लिया करती थीं.

ये लड़कियां बराबरी की होड़ में शराबसिगरेट पीने लगती हैं, इस में कोई शक नहीं.लेकिन जब से यह लौकडाउन हुआ है, तब से बौयफफ्रैंड से मिलना भी दूभर हो गया है. सब अपनेअपने घरों में बंद हैं, तो ऐसे में जिन औरतों को पीने का शौक है, उन का क्या हो?

लाइन में लड़कियां

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May Second 2020