लौकडाउन में उजड़ने लगी हैं देह धंधे की मंडियां

Saras Salil - Hindi|May First 2020

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लौकडाउन में उजड़ने लगी हैं देह धंधे की मंडियां
लौकडाउन में उजड़ने लगी हैं देह धंधे की मंडियां

49 साल की सोनिया बीते 25 सालों से मुंबई के कमाठीपुरा में रहते हुए देह धंधा कर रही है यानी वह सैक्स वर्कर है. सालों पहले वह नेपाल से इस बदनाम इलाके में आई थी. तब वह कमसिन थी सो अच्छाखासा पैसा मिल जाता था, क्योंकि जवान लड़कियां हमेशा ही ग्राहकों की पहली पसंद रही हैं.

हालांकि इस उम्र में भी सोनिया 2-3 हजार रुपए रोजाना कमा लेती है, लेकिन लौकडाउन के बाद यानी 24 मार्च से सोनिया ने एक धेला भी नहीं कमाया है, क्योंकि कोरोना की दहशत और लौकडाउन के चलते ग्राहक कमाठीपुरा की तरफ झांक भी नहीं रहे हैं.

हैरानपरेशान सोनिया ऐसी पहली सैक्स वर्कर है, जिस ने मीडिया के सामने अपना दुखदर्द बयां किया है..

सोनिया कहती है, “पूरी जिंदगी इधर निकल गई, लेकिन इतने बुरे हालात कभी नहीं देखे. इतने बम फटे, अटैक हुए, बीमारियां आईं, पर ऐसी वीरानी कभी नहीं देखी."

सोनिया जिस कमरे में रहती है, उस में 3 और सैक्स वर्कर रहती हैं. उन्हें भी हालात सुधरते नहीं दिख रहे. बकौल सोनिया, “अगर हालात ऐसे ही रहे तो हमें खानेपीने के लाले पड़ जाएंगे. अभी तो मकान मालिक को किराया देने के भी पैसे नहीं हैं."

सोनिया के साथ रहने वाली जया भी उसी की तरह काफी परेशान है कि अब क्या होगा. कमाठीपुरा में इतना सन्नाटा उस ने भी पहले कभी नहीं देखा.

जया ने अपने 6 साल के बेटे को पुणे में एक रिश्तेदार के यहां रख छोड़ा है, जिस से वह पढ़लिख कर कुछ बन सके. बेटे की पढ़ाई के लिए उसे हर महीने 1,500 रुपए भेजने पड़ते हैं, जो अब शायद ही वह भेज पाए. अभी तो चिंता पेट पालने की है, क्योंकि धंधा एकदम से बंद हुआ है जिस की उम्मीद उस ने या देह धंधे के लिए बदनाम कमाठीपुरा लिए क्यों नहीं कहते हो, क्योंकि हमारे ऊपर भी बूढे मांबाप और बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी है. अब जब धंधा चौपट है, तो हम क्या करें?"

कमाठीपुरा में तकरीबन 2 लाख सैक्स वर्कर हैं, जो लौकडाउन के चलते बदबूदार और संकरी कोठियों में कैद हो कर रह गईं हैं. इन के ज्यादातर ग्राहक भी रोज कमानेखाने वाले ही होते हैं, जिन का अब कहीं अतापता नहीं है.

ये देह मंडियां हुईं सूनी

कमाठीपुरा से भी बड़ा बाजार कोलकाता का सोनागाछी है, जो एशिया का सब से बड़ा रैड लाइट इलाका है. एक अंदाजे के मुताबिक, सोनगाछी में तकरीबन 3 लाख सैक्स वर्कर हैं. उन में से कुछ पार्टटाइम देह धंधा करती हैं तो कुछ फुलटाइम.

उन का एक बड़ा संगठन भी है जिस का नाम 'दरबार महिला समन्वय समिति' है. इस संगठन में तकरीबन एक लाख, 30 हजार सैक्स वर्करों ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है और इस से ज्यादा वे हैं, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं समझी.

सोनागाछी में हैरानी की बात यह है कि वहां लौकडाउन से पहले ही ग्राहकों की आवाजाही कम हो चली थी. 'दरबार महिला समन्वय समिति' की एक पदाधिकारी महाश्वेता मुखर्जी के पास पश्चिम बंगाल के अलगअलग इलाकों से सैक्स वर्करों के फोन आने लगे थे कि उन्हें भुखमरी से बचाने की कोई पहल की जाए.

30 मार्च आतेआते तो हालात काफी भयावह हो चले थे. ज्यादातर सैक्स वर्करों के पास जमापूंजी और राशन खत्म हो चला था.

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May First 2020