सतरंगी रंग

Saras Salil - Hindi|January First 2020

सतरंगी रंग
पायल छुट्टियों में होस्टल से घर आई थी, पर यहां के माहौल में उस का मन जरा भी नहीं लग रहा था. दरअसल, पायल की दादी उसे होस्टल से वापस घर बुलाना चाहती थीं और वह किसी भी कीमत पर होस्टल छोड़ना नहीं चाहती थी.
शशि श्रीवास्तव

पायल ने उस दिन सुबह से ही घर में हंगामा खड़ा कर रखा था. वह तेजतेज चिल्ला कर बोले जा रही थी, "भाई को बचपन से इंगलिश के प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया है. चलो, मुझे हिंदी मीडियम में पढ़ाया तो कोई बात नहीं, लेकिन अब मैं जो करना चाहती हूं, सब कान खोल कर सुन लो, वह मैं कर के ही रहूंगी."

"मगर, तू ठहरी लड़की. तुझे यहीं रह कर जो करना है कर, वह ठहरा लड़का," दादी की यह बात सुन कर पायल उन्हें चुप कराते हुए बोली," दादी, आप तो चुप ही रहिए. जमाना कहां से कहां चला गया और आप की घिसीपिटी सोच अभी तक नहीं बदली."

पायल एकबारगी दादी को इतना सब बोल तो गई, पर अचानक उसे लगा कि उस ने दादी को कुछ ज्यादा ही बोल दिया है, इसलिए वह मन में पछतावा करते हुए दादी के गले में हाथ डाल कर बोली," अरे मेरी प्यारी दादी, सौरी," फिर उस ने अपने दोनों कान पकड़ लिए थे.

दादी के गाल सहलाते हुए पायल जमाना बहुत बदल गया है बोली," दादी. अब लड़कियां वे सब काम कर रही हैं, जो पहले सिर्फ लड़के करते थे. दादी, आज हम सब को भी अपनी सोच बदलने की जरूरत है."

गांव में कहीं भी कोई भी रूढ़िवादी बातें करता, तो पायल उस से उलझ जाती. कई बार तो घर में ही किसी न किसी से किसी न किसी बात पर उस की कहासुनी हो जाती.

इस के बाद पायल अपने होस्टल चली गई. वहां वह अपनी 12वीं जमात की तैयारी में जुटी हुई थी. कुछ महीने बाद ही उस के इम्तिहान शुरू होने वाले थे. उस दिन वह बैठीबैठी सोच रही थी, बठाबा ' मैं अपनी जिद पर इतनी पढ़ने आई हूं. दूर मम्मीपापा ने मुझ पर भरोसा कर के ही परदेश में पढ़ने भेजा है. मुझे कुछ तो ऐसा कर के दिखाना चाहिए, जिस से मेरे मम्मीपापा का सिर गर्व से ऊंचा हो सके,' अभी वह यह सब सोच ही रही थी कि उस के घर से फोन आ गया. उस ने झट से मोबाइल उठाया और बोल उठी, “ मैं अभी आप सब को याद ही कर रही थी."

पर यह क्या, उधर से तो कोई और ही बोल रहा था. किसी अनजान शख्स की आवाज सुन कर पायल घबरा गई. " अरे, आप कौन बोल रहे हैं?" उस के इतना पूछने पर उधर से आवाज आई,' हम तुम्हारे पड़ोसी मदन चाचा बोल रहे हैं. तुम्हारी मम्मी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई है, तुम तुरंत यहां आ जाओ.'

पायल घबराते हुए मदन चाचा से पूछ बैठी," आखिर हुआ क्या है मेरी मां को?"

जवाब में मदन चाचा ने बस इतना ही कहा,' अरे बिटिया, तुम बस जल्दी से घर आ जाओ.'

पायल फिर कुछ परेशान सा होते हुए बोली," चाचा, मेरी पापा से बात तो कराओ."

इस पर मदन चाचा ने कहा, ' पापा अभी यहां नहीं हैं. वे डाक्टर साहब को लेने गए हैं.'

मोबाइल फोन अपनी जेब में रखते हुए पायल ने जल्दी से बैग में 3 4 जोड़ी कपड़े डाले और फटाफट चल पड़ी रेलवे स्टेशन की ओर. उस के मन में तरहतरह की बातें आ रही थीं. रास्ते में वह थोडीथोड़ी देर में अपने पापा व चाचा के मोबाइल पर काल करती रही, पर कोई भी उस की काल नहीं उठा रहा था. इस से उस के मन की बेचैनी और भी बढ़ती जा रही थी.

घर के दरवाजे पर काफी भीड़ देख कर पायल की बेचैनी और भी बढ़ गई. वह आपे से बाहर हो गई. उस के कदमों की रफ्तार और भी तेज हो गई. वह एक ही सांस में अपने घर तक पहुंच गई.

पायल ने देखा कि उस की मां को जमीन पर लिटा कर रखा गया था. उन के चारों ओर गांव की कई औरतें बैठी हुई थीं.

इतना देखते ही वह दहाड़ें मारमार कर रोने लगी. वह अपनी दादी से चिपक कर फूटफूट कर रो पड़ी. वह उन से हो गया... पूछती जाती," मां को क्या मेरी मां कहां चली गईं मुझे छोड़ कर."

पायल दादी के सामने सवालों की झड़ी लगाती चली जा रही थी, पर दादी के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं था.

रूपा चाची ने पायल को चुप कराते हुए कहा, “ चुप हो जा पायल बेटी,' और फिर वे खुद भी फूटफूट कर रोने लगी.

रूपा चाची रोतेरोते ही बोलीं, " अचानक ही सबकुछ हो गया. पता ही नहीं चला कि क्या हुआ था दीदी को. डाक्टर ने आ कर देखा तो बताया कि इन की तो सांस ही बंद हो चुकी है."

उस समय पायल को रहरह कर अपनी मां की सभी बातें याद आ रही थीं और रोना भी आ रहा था.

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January First 2020