लुटेरी दुलहनों से सावधान

Saras Salil - Hindi|February First 2020

लुटेरी दुलहनों से सावधान
26 साल के रूपेश शर्मा की जिंदगी में जो हुआ वह वैसे तो आएदिन की बात हो चली है, पर इस के बाद भी चोरी और ठगी के मामले लगातार उजागर होने लगे हैं तो बात सबक लेने की है कि बिना छानबीन के जल्दबाजी में शादी तय कर लेना अब बेहद जोखिम भरा काम हो चला है. इस से अरमान और भरोसा तो टूटते ही हैं, जिंदगीभर के लिए एक ऐसा जख्म मिल जाता है जो थोडाबहुत सूखता तो है, पर भरता कभी नहीं.
भारत भूषण श्रीवास्तव

5 दिसंबर, 2019 को मध्य प्रदेश के महाकौशल इलाके के गाडरवारा में गांव सिरसीरी से एक बरात गाजेबाजे के साथ भोपाल आई थी, जिस का दूल्हा रूपेश था और दुलहन का नाम था रागिनी.

रूपेश और रागिनी की शादी ब्राह्मण समाज के एक बिचौलिए कौशल प्रसाद शर्मा ने तय कराई थी, जो भोपाल के नजदीक रायसेन जिले के उदयपुरा के रहने वाले थे.

शादी की बातचीत तकरीबन 3 महीने पहले शुरू हुई थी और रूपेश रागिनी को भोपाल में उस के घर आ कर पसंद भी कर गया था. तब रागिनी के पिता नंदकिशोर शर्मा ने अपने होने वाले दामाद की खूब खातिरदारी की थी.

धीरेधीरे बात आगे बढ़ी तो शादी की तारीख भी 5 दिसंबर, 2019 तय हो गई.

नंदकिशोर शर्मा भोपाल के महामाई का बाग इलाके में रहते थे. रूपेश महामाई का बाग इलाके में 1-2 बार आया भी और जब शादी तय हो गई तो उस के पिता शिवनारायण शर्मा भी घर वालों समेत रीतिरिवाज पूरे करने आए.

इन मुलाकातों के दौरान बिचौलिया कौशल प्रसाद शर्मा मौजूद रहे और बातचीत आगे बढ़ाने में दोनों पक्षों की मदद करते रहे. नंदकिशोर शर्मा शादी पक्की करने सिरसीरी गए थे, तब उन्होंने रूपेश को सोने की एक अंगूठी और कपड़े दिए थे. बाकी रस्में भोपाल में पूरी होना तय हुआ था.

सगाई की रस्म में शिवनारायण शर्मा ने अपनी होने वाली बहू को तोहफे की शक्ल में 5 तोले सोने की चूड़ियां, आधा तोले सोने की अंगूठी, साड़ी और चांदी की पायलें दी थीं.

शादी नंदकिशोर शर्मा के घर के पास अवधपुरी सी सैक्टर से होना तय हुई थी. दोनों पक्षों ने जब खानेपीने का हिसाब लगाया, तो वह तकरीबन 4 लाख रुपए निकल रहा था.

11 नवंबर, 2019 को जब नंदकिशोर शर्मा शादी का कार्ड देने सिरसीरी गांव पहुंचे, तब यह तय हुआ कि इस प्रीतिभोज का खर्च दोनों पक्ष मिल कर उठाएंगे, इसलिए शिवनारायण शर्मा ने अपने हिस्से के 2 लाख रुपए नकद नंदकिशोर शर्मा को दे दिए. फिर यह सोचते हुए वे बेफिक्र हो गए कि अब बरात के आनेजाने के सिवा कोई खास खर्च नहीं करना है. लिहाजा, वे बेटे की शादी की तैयारियों में जुट गए.

शादी के कार्ड सभी जानपहचान वालों और नातेरिश्तेदारों में बांट दिए गए थे और जिन लोगों को भोपाल बरात में ले जाना था, उन्हें फोन पर निजी तौर पर तैयार रहने को कह दिया गया था.

8 लाख रुपए का चूना

रूपेश की तो खुशी का ठिकाना नहीं था. उस के दिलोदिमाग में रागिनी रचबस गई थी. 5 दिसंबर, 2019 को वह तरहतरह के सपने देखता हुआ बरातियों समेत भोपाल आया था. रास्तेभर बराती खूब मौजमस्ती करते रहे थे.

भोपाल आ कर रूपेश के पिता ने रास्ता पूछने के लिए रागिनी के घर फोन किया तो नंदकिशोर शर्मा का फोन स्विच औफ आ रहा था. उन्होंने लड़की वालों के और भी कुछ नंबर लगाए, तो वे सभी बंद मिले. और तो और कौशल प्रसाद शर्मा का भी फोन नंबर बंद मिला तो वे किसी अनहोनी से घबरा उठे.

बरातियों से भरी बस जैसेतैसे पता पूछतेपूछते शादी वाले घर 284, सैक्टर सी, अवधपुरी पहुंची तो वहां कौए उड़ रहे थे यानी सन्नाटा पसरा था. मंडप, शहनाई, बैंडबाजे का कहीं दूरदूर तक नामोनिशान नहीं था. खैर, घर पर बस रुकी तो बराती एकएक कर उतरने लगे, लेकिन सभी चौंके हुए थे कि आखिर माजरा क्या है. कहां तो रास्तेभर यह सोचते हुए आए थे कि भोपाल में जनवासे में पहुंच कर पहले नहाएंगेधोएंगे और फिर गरमागरम नाश्ता करेंगे, पर यहां तो दरवाजे पर ताला झूल रहा था.

बरातियों को बातों में मशगूल छोड़ कर शिवनारायण शर्मा मकान के पास पहुंचे. पूछने पर मकान मालिक तारांचद जैन ने जो जवाब दिया, उसे सुन कर उन के पैरों तले जमीन खिसक गई.

articleRead

You can read upto 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log-in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

February First 2020