प्रतिबिंब

Saras Salil - Hindi|January First 2020

प्रतिबिंब
जिंदगी में कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जिन्हें भुलाए भी भूला नहीं जा सकता. एक ऐसा ही दर्द मैं कहानी के रूप में उतार रहा हूं.
राम गोपाल गहलोत

हुआ यों कि एक बार मैं एक ढाबे में काम कर रहा था कि अचानक एक औरत मेरे सामने आ कर खड़ी हो गई. मैं ने उस से पूछा, “तुम हो कौन?"

उस ने जवाब दिया, “मैं बाहर की रहने वाली हूं? और इस शहर में रहने के लिए आई हूं."

मैं ने कहा, "यह जगह अच्छी नहीं है. तुम जहां से आई हो, वहीं चली जाओ. हम अच्छे आदमी नहीं हैं. तुम यहां रह कर बरबाद हो जाओगी."

“जी नहीं, मैं एक भटकी हुई औरत हूं. क्या तुम मुझे पनाह दे सकते हो?"

" हां, दे सकता हूं. तुम रात यहीं रुक जाओ," मैं ने कुछ सोचते हुए जवाब दिया.

रात के 9 बज रहे थे. मैं बरतन साफ कर रहा था. उस ने भोजन मांगा. मैं ने भोजन दिया. उस ने खा कर अपना मुंह साफ किया.

मैं ने उस के बारे में जानना चाहा. उस ने बताया," मेरा नाम सायना है."

मैं उसे ध्यान से देख रहा था. वह बड़ी खूबसूरत और जवान लग रही थी. उस ने मुझ से पूछा," क्या तुम मुझ से शादी करोगे?"

मैं ने हां में अपना सिर हिलाया. कुछ समय और बीत गया. रात के साढ़े 10 बज रहे थे. ढाबे पर मौजूद लोग अपने घर चले गए, मैं ने अपना बिस्तर संभाला. वह मेरे पास आ कर बैठ गई.

वह दूधिया रंग की गोरीचिट्टी थी. मैं भी एकाकी जिंदगी जीतेजीते तंग आ गया था, इसलिए मुझे औरत की जरूरत सता रही थी.

शटर बंद हो चुका था. ढाबे का इक्कादुक्का वाहन ही सड़क पर गुजर रहे थे. मैं ने उसे पास खींचा. उस ने कोई विरोध नहीं जताया, बल्कि वह खुद मुझ से लिपट गई.

इतनी जल्दी ही सबकुछ हो जाएगा, यह सोचा तक नहीं था. मैं ने उसे अपनी बांहों में भर लिया. रात के ठीक 12 बज रहे थे. सबकुछ होने के बाद मैं उस से अलग हुआ और अपने बिस्तर पर आ गया. वह अपने कपड़े पहन रही थी.

वह मुझे देख कर मुसकरा रही थी.

मुझे जिंदगी में पहली बार औरत के सुख का अहसास हुआ.

दूसरे दिन मैं ने उसे चायनाश्ता कराया और किराए का मकान तलाश करने चल पड़ा, लेकिन कहीं पर भी का मकान नहीं मिल सका. शाम के 6 बज रहे थे. मैं किसी फैक्टरी के पास से निकल रहा था कि अचानक एक आदमी ने आवाज दी," भाई, क्या तुम मेरे यहां चौकीदारी करोगे?"

मैं तैयार हो गया और रात की चौकीदारी के लिए वहीं रुक गया. रातभर चौकीदारी करता रहा. उस की याद आती रही और अगले दिन सुबह मैं वहां से चला आया.

सुबह जब मैं ढाबे पर पहुंचा, तब क्या देखता हूं कि वह मुंह फुलाए बैठी है और मुझ से शिकायत करने लगी," ऐ जनाब, तुम कहां गायब हो गए थे. नहीं करनी शादी तो वैसे ही चलने दें."

" देखो, मैं तुम्हारे लिए मकान तलाश करने गया था. लेकिन मकान नहीं मिल सका. मुझे अफसोस है."

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January First 2020