जाति की वकालत करता नागरिकता संशोधन कानून

Saras Salil - Hindi|February Second 2020

जाति की वकालत करता नागरिकता संशोधन कानून
नया नागरिकता संशोधन कानून भले ही भारत में लागू हो गया है, पर सारे देश में हो रहे इस के विरोध ने इसे कठघरे में खड़ा कर ही दिया है. जिस कानून को दोनों सदनों ने बहुमत से पास किया हो, उस कानून को ले कर सारे देश में बवाल मचा हुआ है.
कुशलेंद्र श्रीवास्तव

जाहिर है कि यह कानून सब को मंजूर नहीं है. इसे ले कर विपक्ष में तो असंतोष है ही, साथ ही देश के कुछ राज्यों में भी असंतोष फैला हुआ है. जनता के इस विरोध ने यह साबित कर दिया है कि हर समय लच्छेदार भाषणों से जनता को नहीं बरगलाया जा सकता.

नोटबंदी और जीएसटी कानून के बाद आर्थिक मंदी की मार झेल रही केंद्र सरकार जनता को असली मुद्दों से भटका कर हिंदुत्व के अपने एजेंडे पर चल कर पीछे के दरवाजे से वर्ण व्यवस्था को वापस लाना चाहती है.

राम मंदिर जैसे मसलों पर धार्मिक भावनाएं भड़का कर देश के हिंदूमुसलिम समाज के बीच अलगाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि भाजपाई पुजारियों की असली कमाई इन्हीं मंदिरों से ही होती है.

संसद से पास नागरिकता संशोधन कानून अफगानिस्तान, बंगलादेश और पाकिस्तान से भारत में आए गैरमुसलिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने की बात करता है. इन तीनों देशों को इसलिए रखा गया है, क्योंकि ये तीनों देश धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं. पाकिस्तान और बंगलादेश तो साल 1947 तक भारत का हिस्सा थे और अफगानिस्तान तकरीबन भारत का सांस्कृतिक हिस्सा था. तीनों ही अब इसलामिक देश हैं...

यह कानून साल 1955 में पास नागरिकता कानून को संशोधित कर उन हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई और पारसियों को भारत की नागरिकता के योग्य बना देगा, जो अफगानिस्तान, बंगलादेश और पाकिस्तान से भारत आए हैं.

यह अधिकार 31 दिसंबर, 2014 तक उन सभी लोगों पर लागू होगा, जो इस मीआद तक भारत में आ चुके हैं.

नागरिकता संशोधन कानून में लिखा है कि भारत की नागरिकता उन्हें ही दी जाएगी, जो 5 सालों से भारत में रह रहे हैं और अपने देशों में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हैं.

इस कानून के पास होने के पहले तक भारत की नागरिकता केवल उन्हीं लोगों को मिलती थी, जिन का जन्म भारत में हुआ हो या उन के पुरखे भारत के नागरिक हों या वे कम से कम 12 साल से भारत में रह रहे हों.

इस कानून की धारा 7 में एक उपधारा डी भी शामिल की गई है, जिस के मुताबिक अगर भारत का कोई ओवरसीज कार्ड है और उस ने नागरिकता कानून या किसी दूसरे कानून का उल्लंघन किया है, तो उस की ऐसी नागरिकता खारिज कर दी जाएगी.

इस सरकार ने यह मान लिया है कि मुसलिम बहुल देशों में अल्पसंख्यकों यानी हिंदुओं पर जोरजुल्म हो रहे हैं. वे अपनी जान बचा कर भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं. इन देशों के बहुत से शरणार्थी भारत में रह भी रहे हैं.

नागरिकता संशोधन कानून ने अनेक सवालों को जन्म दे दिया है. इस का मतलब है कि बदले में हमें अपने अल्पसंख्यकों, मुसलिमों से भेदभाव करने का हक है और हम उन पर जोरजुल्म करें तो गलत न होगा. लिहाजा, यह भेदभाव फैलाने वाला कानून है.

हिंदुत्व की छाप

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