रासलीला बहू की

Manohar Kahaniyan|June 2020

रासलीला बहू की
प्रीति और अंकित अगर एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे तो उन्हें सामाजिक बंधनों को तोड़ कर एक हो जाना चाहिए था. ऐसा हो गया होता तो न तो प्रीति के 2 बच्चे अनाथ होते, न ही वृद्ध जनार्दन केसरी और उन की पत्नी की बुढ़ापे की लाठी टूटती और न अंकित और प्रीति को...
शैलेंद्र कुमार 'शैल'

रात के 10 बज रहे थे. काली चौड़ी सड़कें स्ट्रीट लाइट की दूधिया रोशनी मेंनहाई हुई थीं.सड़क पर इक्कादुक्का वाहनों का जानाआना जारी था. खाली पड़ी सड़क पर सफेद रंग की एक वैगनआर कार सामान्य रफ्तार से दौड़ रही थी. कार की ड्राइविंग सीट पर 35 वर्षीय कार्तिक केसरी बैठा था.

उन की बगल वाली सीट पर पत्नी प्रीति बैठी थी. पतिपत्नी दोनों बेहद खुश थे. ये लोग झारखंड की राजधानी रांची से दुर्गा पूजा का सामान खरीद कर घर लौट रहे थे. उन का घर खूटी जिले के पिठोरिया थाना क्षेत्र के विक्टोरिया में था.

जैसे ही कार्तिक की कार खूटी जिले के बाडू चौक के पास पहुंची, एक मोटरसाइकिल पर सवार 2 युवक उस की कार को ओवरटेक करते हुए सामने आ गए. उन्होंने अपनी बाइक तिरछी कर के कार के आगे खड़ी कर दी. बाइक सामने आने से कार्तिक ने अचानक ब्रेक लगा कर कार को रोका. उन की कार बाइक से टकरातेटकराते बची. बाइक से करीब 10 मीटर दूर सफेद रंग की एक स्कोर्पियो कार खड़ी थी.

कार्तिक कुछ समझ पाता, तब तक दोनों बाइक सवार उस के करीब पहुंच गए और गालियां देते हुए उसे कार से बाहर निकलने को कहने लगे. इतने में स्कोर्पियो से भी 2 युवक बाहर निकले. उन में से एक के हाथ में करीब 3 फीट लंबा और मोटा लोहे का रोड था.

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June 2020