भाई का बलिदान

Manohar Kahaniyan|December 2019

भाई का बलिदान
वह एक छोटा सा शहरनुमा कस्बा था , जहां गल्ले की एक बहुत बड़ी मंडी थी , मैं वहां के थाने का इंचार्ज था. अभी शाम होने में कुछ समय बाकी था कि श्मशान घाट के पीछे गड्ढे में एक आदमी की लाश पड़ी है,
अहमद यार खान
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December 2019