बरगद का पेड़ और नदी
Champak - Hindi|September Second 2020
बरगद का पेड़ और नदी
सुंदरवन से हो कर ताजे पानी की एक नदी बहती थी. नदी का पानी बहुत मीठा और ताजा था. सब जानवर उसी नदी का पानी पीते थे.
नीरज कुमार मिश्रा

नदी की वजह से ही जंगल में चारों तरफ हरियाली छाई रहती थी, पर पिछले कुछ समय से जंगल के जानवर नदी को गंदा कर रहे थे और जल प्रदूषण फैला रहे थे, फिर भी नदी शांत और सब को मीठा जल प्रदान कर रही थी.

एक दिन नदी के किनारे लगा बरगद का पेड़ नदी को चिढ़ाने लगा और बोला, “अरे नदी, तुम किसी काम की नहीं हो, एक ही जगह पर वर्षों से बह रही हो और तुम्हारा जीवन भी रोमांचक नहीं है. हमें देखो, हम तो हवा से हिलतेडुलते भी रहते हैं और दूर तक हमे सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं, जिस से हम जीवन का आनंद लेते हैं. तू है कि बस बहे जा रही है और तेरा अपना पानी भी तेरे पास नहीं रुकता. इस जंगल में तेरा कोई महत्त्व नहीं है.''

नदी अपने लिए ऐसी बातें सुन कर काफी परेशान हो गई. अगली सुबह जब जंगल का राजा शेरसिंह नदी में पानी पीने आया तब नदी ने उस से कहा, "महाराज, मैं एक ही जगह पर बहतेबहते परेशान हो गई हूं, मुझे कहीं और ले चले चलो.''

नदी की बात सुन कर शेरसिंह हंसने लगा और बोला, "अरे, तू नदी है. भला तू कहां जाएगी? तू तो बरसों से यहीं बह रही है,” इतना कह कर शेरसिंह वापस चला गया.

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