हरे चारे के लिए जई की खेती
Modern Kheti - Hindi|September 15, 2020
हरे चारे के लिए जई की खेती
पशुओं के लिए पर्याप्त गुणवत्ता युक्त हरा चारा उपलब्ध न होने की वजह से उनकी उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
डॉ. निरंजन कुमार बरोड़,डॉ. सतीश कुमार, डॉ. नरेन्द्र कुमार गोयल

अत: हमें ऐसी फसलों को फसल चक्र में सम्मलित करना चाहिए जिससे खाद्यान्न व चारा दोनों की पूर्ति हो सके। जई एक ऐसी फसल है जिससे न केवल पौष्टिक हरा चारा बल्कि मानव उपभोग के लिए स्वास्थप्रद खाद्यान्न भी उपलब्ध होता है। जई की खेती प्रमुख रूप से पशुओं के लिए हरा चारा और दाना उत्पादन के लिए प्रचलित है। भारत के उत्तरी भागों में रबी की ऋतु में उगाई जाने वाली यह महत्वपूर्ण चारा फसल है तथा इसके दानों का उपयोग पशु दाना और मानव अपने भोजन में करते हैं। पशुओं के लिए जई का चारा पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसके हरे चारे में कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है। इसके अलावा हरे चारे में 10-12 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन तथा 30-35 प्रतिशत सूखा पदार्थ पाया जाता है। जई का चारा बरसीम या रिजका के चारे के साथ मिलाकर पशुओं को खिलाया जाता है। जई का प्रयोग हरा चारा, भूसा, हे व साइलेज के रूप में किया जाता है।

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September 15, 2020